परिवार की सुख समृद्धि और बच्चों की दीर्घायु के लिए वीरवार को महिलाओं ने संकट हरण गणेश चतुर्थी (पुगे) का वृत श्रद्धा और आस्था के साथ रखा।
इस संबंध में आस्थावानों ने बताया कि हिंदू मान्यता के अनुसार महिलाएं पुत्र प्राप्ति के लिए गणेश चतुर्थी का व्रत रखतीं हैं।
महिलाओं ने दिनभर भगवान गणेश के मंदिरों में पूजा-अर्चना की।
कई महिलाओं ने सुबह सरगी खाई। दिन भर महिलाएं अर्घ्य देने की तैयारी में जुटी रही। अर्घ्य देने के लिए महिलाओं ने तिल, गुड़, गन्ना, मूली आदि की खरीददारी की।
दिनभर बिना पानी पिए व बिना कुछ खाए रात चन्द्र उदय पर भगवान चंद्र देव को अर्घ्य देकर व्रत की सफलता की कामना की।
इसके उपरांत गन्ने और मूली की पूजा करने के बाद माताओं ने बच्चों के हाथों में ढाई मुट्ठी पुगे सहित तिल, गुड़, गन्ना, मूली का दान करवाया।
महिलाओं ने सामान दान किया और व्रत का सामान ग्रहण किया। महिलाओं ने एक दो दिन पहले ही तिल, गुड़, गन्ना आदि की खरीददारी शुरू कर दी थी।
पुगे के व्रत को सर्दी के साथ भी जोड़कर देखा जाता है। माना जाता है कि पुगे के व्रत के बाद सर्दी भी कम हो जाती है।
बच्चों की अधिक उम्र के लिए रखा।
बच्चों की माताओं ने वीरवार को संतान की अधिक आयु और बेहतर स्वास्थ्य के लिए संकट चौथ का व्रत रखा। इसके तहत महिलाओं ने सुबह सादा भोजन करने के बाद दिनभर बिना अन्न जल के उपवास रखा।
शाम को भगवान गणेश जी की पूजा कर गुड़ और तिल का प्रसाद बनाकर चांद को अर्घ्य देकर भोग लगाने के बाद अन्नजल ग्रहण किया।
गांव के मंदिर में गन्ना व मूली के साथ तिली और गुड़ को मिलाकर पूजा करते हुए महिलाओं ने सकंट चौथ व्रत पूरा किया।
बुजुर्ग चंचला देवी, सुमित्रा देवी, शुकतंला देवी का कहना है कि सर्दियाें से सकंट चौथ व्रत की प्रथा चल रही है जिसे उतर भारत के राज्यों में माताएं अपने बच्चों की दीर्घ आयु के लिए उपवास रखती है।