एक तरफ जहां राज्य में स्वाइन फ्लू एच1एन1 वायरस को लेकर अलर्ट जारी किया गया है, वहीं जिले के अस्पतालों में इसकी जांच के लिए कोई विशेष इंतजाम नहीं किए गए हैं। अभी तक न तो दवाई मंगाई गई है और न ही किसी विशेष जांच केंद्र की स्थापना की गई है।
ऐसे में जिले में अगर कोई मामला सामने आने पर अफरातफरी मचने के सिवाय कोई चारा नहीं है। जिले में एक जिला अस्पताल और पांच उप जिला अस्पताल हैं, लेकिन कहीं भी वायरस की जांच के लिए केंद्र नहीं बनाया गया है। उप जिला अस्पतालों में वायरस की जांच के लिए जो विशेष किट चाहिए उसकी भी कमी है और दवाई को तो मंगवाई ही नहीं गई है।
जिला अस्पताल के प्रभारी अधीक्षक डाक्टर राजिंद्र के अनुसार अगर कोई मरीज आता है तो आम बीमारी की ही तरह उसे भी ट्रीट किया जाएगा। अस्पतालों से केवल एंटीबायोटिक और बीमारी की ही दवाई मिलेगी। अगर आवश्यकता पड़ी तो मरीजों को रेफर भी किया जा सकता है। गौरतलब है कि जिला अस्पतालों को स्वास्थ्य विभाग ने खास हिदायतें जारी की हैं।
जिले में राज्य का प्रवेश द्वार होने की वजह से भारी संख्या में लोगों का आना-जाना लगा रहता है। हजारों की संख्या में वाहन लखनपुर से ही आते-जाते हैं। ऐसे में राज्य का सबसे पहला जिला अस्पताल कठुआ ही है। अगर इस अस्पताल में ही सुविधाओं की कमी है तो अन्य क्षेत्रों में हालात से कैसे निपटा जाएगा।
गौरतलब है कि लखनपुर से आवाजाही के कारण ही राज्य में कठुआ एड्स के मरीजों के मामले में दूसरे स्थान पर है और संभाग में पहले स्थान पर। ऐसे में अगर यहां पर कोई केस आता है तो वह संभवता राज्य के प्रवेश द्वार होने के कारण ही होगा, लेकिन राज्य के प्रवेश द्वार पर भी कोई जांच केंद्र नहीं बनाया गया है। बिना जांच के ही वाहनों को आने दिया जा रहा है।