जमीन के फर्जी कागजात बनाकर धोखाधड़ी करने के एक मामले में अदालत ने विजिलेंस आर्गनाइजेशन को जम्मू के तत्कालीन पटवारी और अन्य के खिलाफ केस दर्ज करने के आदेश दिए हैं।
शिकायतकर्ता रामरतन के अनुसार उन्होंने खानपुर नगरोटा निवासी राकेश मगोत्रा से दो कनाल सात मरला जमीन खरीदी। उक्त जमीन राकेश मगोत्रा और उसके पिता नेकराम मगोत्रा ने ओमप्रकाश से खरीदी थी। एग्रेरियन रिफोर्म एक्ट के तहत ओमप्रकाश ने जमीन का मालिकाना हक दोबारा पा लिया।
शिकायतकर्ता के अनुुसार राजस्व अधिकारियों ने दो मामलों में फर्द इंतिखाब जारी करने के समय वास्तविक तथ्यों को छुपाया। शिकायतकर्ता ने आवेदन के साथ बताया कि उक्त जमीन पर उनका कब्जा है और अब ओमप्रकाश के वारिस उन्हें धमकियां दे रहे हैं।
जांच में पाया गया कि जमीन की पहली बिक्री के दौरान शालोराम ने फर्द तैयार की, जिसे जम्मू के तत्कालीन तहसीलदार शांति स्वरूप ने अटेस्ट की। विजिलेंस रिपोर्ट के अनुसार राजस्व अधिकारियों ने एग्रेरियन एक्ट का उल्लंघन करते हुए कागजात जारी किए। मामला सिविल था, इसलिए एफआईआर दर्ज नहीं की गई।
भ्रष्टाचार निरोधक विशेष जज संजय धर ने माना कि आवेदक और ओमप्रकाश के वारिसों के बीच सिविल याचिका लंबित है, लेकिन मामले की सच्चाई यह है कि राजस्व अधिकारियोें ने केस के महत्वपूर्ण तथ्यों को छुपाया। तमाम बातों को ध्यान में रखते हुए अदालत ने तत्कालीन पटवारी और अन्य के खिलाफ केस दर्ज कर जांच आगे बढ़ाने को कहा। जेएनएफ