लंबे समय से लगभग मृतप्राय स्थिति में रहे पब्लिक सर्विस कमीशन (पीएससी) को नया अध्यक्ष तथा सदस्य मिलने से रिक्त पड़े पदों पर नियुक्तियों का सिलसिला शुरू होने की उम्मीद जगी है।
इससे बेरोजगारों के चेहरे पर खुशी की चमक है। पीएससी के अध्यक्ष एसएल भट्ट गत सितंबर महीने में सेवानिवृत्त हो गए थे। एकमात्र बचे सदस्य केबी जंडियाल भी नवंबर में सेवानिवृत्त हो गए। इसके बाद से पीएससी लगभग मृतप्राय था।
इस बीच इस दिशा में गतिरोध दूर करने का प्रयास किया गया। वरिष्ठ आईएएस और वित्त आयुक्त (उद्योग एवं वाणिज्य) खुर्शीद गनई को पांच साल के लिए अध्यक्ष तथा छह नए सदस्यों को नियुक्त किया गया, लेकिन राज्यपाल ने इसे मंजूरी नहीं दी। राज्यपाल एनएन वोहरा ने यह कहते हुए फाइल लौटा दी कि कुछ सदस्यों की विजिलेंस क्लीयरेंस, इंटिग्रिटी सर्टिफिकेट आदि फाइल के साथ नहीं लगी है।
शिक्षा मंत्री नईम अख्तर ने बताया कि कैबिनेट ने सबसे पहले पब्लिक सर्विस कमीशन के संवैधानिक संकट को दूर करने का प्रयास किया। पूर्ववर्ती नेकां-कांग्रेस गठबंधन की सरकार ने भी इस दिशा में कुछ प्रयास किए थे, लेकिन यह परवान नहीं चढ़ सका। संभवत: यह प्रयास सही दिशा या सही समय पर नहीं किया गया होगा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि कैबिनेट की सिफारिशों को राज्यपाल मंजूरी दे देंगे।