प्रशासन ने 500 सीमावर्ती ग्रामीणों को रविवार देर रात सुरक्षित स्थानों पर ठहराया है। यह जानकारी जिला उपायुक्त ने दी है। पिछले दिनों में पाकिस्तानी की ओर से भले ही गोलाबारी नहीं की गई हो, लेकिन सीमावर्ती ग्रामीणों में दहशत है। सुरक्षा के लिहाज से शनिवार को कई ग्रामीण परिवार सहित सुरक्षित स्थानों की ओर चले गए थे।
हालांकि, ये परिवार रविवार की सुबह लौट आए।दरअसल, शुक्रवार की रात को पाकिस्तानी गोलाबारी से दहशतजदा काकू दे कोठ के कुछ परिवार सरकारी आदेश के बाद शनिवार रात को रिहाल गांव चले गए थे। उन्हें का भय था कि पाकिस्तान फिर से कहीं फायरिंग न कर दे।
रविवार को भी इन लोगों के लिए स्लैड और रिहाल गांव जाने के लिए प्रशासन ने गाड़ियां भेजीं। गांव के पूर्व पंच बलदेव सिंह ने बताया कि प्रशासन ने गांव में गाड़ियां भेज दी हैं। देर रात 500 ग्रामीणों को राधास्वामी सत्संग भवन और अन्य सरकारी इमारतों में ठहराया गया है।
यह जानकारी देते हुए जिला उपायुक्त ने बताया कि सीमा पर कब हालात खराब हो जाएं, यह निश्चित नहीं रहता है। इसलिए ग्रामीणों की सुरक्षा के लिए एहतियातन यह कदम उठाया गया है। इधर, भारतीय सुरक्षा बलों द्वारा गोलाबारी का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए पाकिस्तान चुप हो गया।
इसके बाद शनिवार के बाद रविवार को भी देर रात तक पाक रेंजरों ने फायरिंग नहीं की। संतोष कुमारी, गारा राम, सुरिंद्र सिंह आदि ने कहा कि उन्होंने अपने बच्चों को सुरक्षित स्थानों पर भेज दिया था। सीमावर्ती ग्रामीण करतार चंद, सोहन लाल, तीर्थराम, जय सिंह का कहना है कि वह पाकिस्तान की गोलियों से नहीं डरते, लेकिन अपने परिवार को जोखिम में नहीं डालना चाहते।
गौरतलब है कि पाकिस्तानी रेंजरों ने शुक्रवार को अरनियां सब सेक्टर के काकू दे कोठे, देवीगढ़, चानना, कदवाल कोठे आदि गांवों में गोलाबारी की थी। इसमें दो लोग जख्मी हो गए थे और दो मवेशियों की मौत हो गई।