वार्ड सत्रह कबीर नगर के आंगनबाड़ी केंद्र से बांटे गए एक्सपायरी डेट का बिस्कुट खाने से बीमार हुई बच्ची के मामले ने खाद्य सुरक्षा विभाग में हड़कंप मचा दिया है। विभाग ने इस मामले को कडे़े संज्ञान में लिया है।
मामले की गंभीरता देखते हुए विभाग की टीम ने मंगलवार आंगनबाड़ी केंद्रों में जाकर बिस्कुटों के सैंपल भरे। इन सैंपलों को जांच के लिए जम्मू भेज दिया गया है। उल्लेखनीय है कि एक बच्ची आंगनबाड़ी केंद्र से मिला बिस्कुट खाने के बाद उसे उल्टी और दस्त शुरू हो गए थे।
जब बिस्कुट के पैकेट पर उसके निर्माण की डेट देखी गई तो वह मार्च 2014 की थी। बीमार बच्ची के पिता ने समाज कल्याण विभाग और खाद्य सुरक्षा विभाग में इसकी शिकायत दर्ज करवाई थी। खाद्य सुरक्षा अधिकारी एससी रैना ने बताया कि शिकायत के बाद सैंपलिंग के लिए टीम गठित की गई।
टीम ने वार्ड सत्रह, वार्ड दो और अन्य दो आंगनबाड़ी केंद्रों में जाकर बिस्कुट के सैंपल भरे हैं। बिस्कुट के डिब्बों पर उनके निर्माण की तिथि मार्च/अप्रैल 2014 ही है। ऐसे में सभी बिस्कुट एक्सपायर्ड हो चुके हैं, लेकिन बिस्कुट में ऐसा क्या था कि बच्ची बीमार हो गई या फिर फूड पाइजनिंग हो गई है, इसकी जांच की जाएगी।
उन्होंने कहा कि कोई भी खाद्य पदार्थ उसकी निर्माण तिथि के समाप्त होने के बाद खाया नहीं जाना चाहिए, लेकिन लोग फिर भी एक-दो महीने का कोई फर्क नहीं समझते हैं। सवा साल की बच्ची या और किसी भी बच्चे को ऐसे पदार्थ से उल्टी या फिर दस्त होना संभव है।
बता दें कि एक्सपायर बिस्कुट के मामले में बच्ची के घरवालों की आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और विभागीय अधिकारियों के साथ बहस भी हुई थी। इसके बाद मामले की जांच के लिए खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम को सैंपलिंग के लिए कहा गया था।