घने कोहरे और बारिश न होने के कारण किसानों की फसलें तो खराब हो ही रही हैं मवेशियों के लिए बीजा गया चारा भी अछूता नहीं रह सका।
क्षेत्र के किसानों ने बताया कि दो माह से बारिश न होने से गेेहूं की फसल की चिंता सता रही है साथ ही मवेशियों चारे के लिए लगाई गई बरसीन की फसल पर संकट के बादल छाने लगे हैं। चारे की फसल खराब होने पर इसका असर दूध के कारोबार पर भी पड़ने की आशंका है।
क्षेत्र के किसानों को मौसम की मार के साथ नहरों में पर्याप्त पानी न होने की भी शिकायत है। किसान बैसाखी राम, लाल राम, पूर्णचंद, राम लाल, भारत भूषण, सुभाष चंद्र आदि का कहना है कि पूरा क्षेत्र खेतीबाड़ी पर निर्भर करता है।
इस बार पाकिस्तान की गोलाबारी के कारण धान की फसल में नुकसान उठा चुके किसानों ने किसी तरह गेहूं को बीजा था अब उसमें भी दिक्कतों से किसान बहुत परेशान हैं।
धान की फसल में जान जोखिम में डालकर सिंचाई से जो थोड़ी उपज मिली थी उसका भी सही भाव न मिलने से मेहनत मिट्टी में मिल गई थी।
अब मौसम की मार से किसान को गेेहूं की फसल के साथ ही मवेशियों चारे की चिंता सता रही है। उन्होंने कहा कि इस बार किसानों को हर तरफ से निराशा ही हाथ लगी है।
किसानों ने कहा कि गेेहूं की फसल अच्छी होने से यहां भूसा भी अच्छे दामों में बिक जाता पर वह फसल तो खराब हो रही है, चारे के लिए लगाई गई बरसीन की फसल भी संकट में है।