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आंदोलनकारी वकीलों के आगे झुकी पुलिस

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जम्मू। आखिरकार आंदोलनकारी वकीलों के आगे पुलिस झुक गई है। जम्मू बंद के ऐलान और उसके बाद लगतार बन रहे दबाव के बाद पुलिस के आला अधिकारी गांधीनगर के एसएचओ और दो अन्य पुलिसकर्मियों को सस्पेंड करने पर सहमत हो गए हैं। सूत्रों का कहना है कि इस बाबत आदेश पत्र का प्रारूप भी तैयार कर लिया गया है। ऐसा माना जा रहा है कि बंद की वापसी के ऐलान के साथ ही संबंधित पुलिसकर्मियों के निलंबन का आदेश जारी कर दिया जाएगा। बार एसोसिएशन ने इस नए प्रस्ताव पर विचार विमर्श के लिए रविवार को 12 बजे दिन में अन्य संगठनों के साथ बैठक आहूत की है। समझा जाता है कि उस बैठक के बाद बंद की वापसी का ऐलान कर दिया जाएगा।
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गौरतलब है कि बिना नंबर की एक स्कूटी सीज किए जाने और एक वकील के साथ दुर्व्यवहार के आरोप के बाद पुलिस और वकीलों के बीच पिछले तेरह दिनों से खींचतान चल रही है। वकील शुरू से ही संबंधित पुलिसकर्मियों के निलंबन की मांग पर अड़े हैं। पुलिस पहले इसके लिए तैयार नहीं थी। बंद वापसी के ऐलान और पुलिसकर्मियों के निलंबन के साथ रविवार को इस जंग का पटाक्षेप संभव है। इस बीच बार एसोसिएशन के सचिव रंजीत सिंह ने कहा है कि पुलिसकर्मियों को सस्पेंड किए जाने के लिखित आदेश को देखने के बाद ही बंद की घोषणा को वापस लिया जाएगा जबकि पुलिस पहले बंद की वापसी चाहती है। शनिवार को दिन भर वकीलों का आंदोलन चलता रहा। अदालतों में कामकाज ठप रहा। शनिवार होने के कारण पहले से ही हाईकोर्ट में केसोें की सुनवाई कम रहीं। वकीलों ने सोमवार को जम्मू बंद को लेकर तैयारियां शुरू कर दी लेकिन इस क्रम में पुलिस के आला अधिकारी समझौते का फार्मूला भी तय करते रहे। पहले पुलिस ने एसएचओ गांधीनगर और दो अन्यों को ट्रांसफर या अटैच करने का प्रस्ताव वकीलों के समक्ष रखा। वकीलोें ने इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया। बंद के समर्थन मेें वकीलों ने शाम सात बजे रेडियो स्टेशन पंजतीर्थी से कैंडल मार्च निकाला। कैंडल मार्च रेडियो स्टेशन, कच्ची छावनी, मोती बाजार, परेड, पुरानी मंडी, सिटी चौक, रघुनाथ मंदिर तक निकाला गया। वकीलों ने पुलिस पर यह भी आरोप लगाए कि सोशल मीडिया में फ्लैश किया जा रहा है कि बंद सफल नहीं होगा। वकीलों के खिलाफ दुष्प्रचार किया जा रहा है और जनता को गलत संदेश भेजा जा रहा है।
इस बीच बार एसोसिएशन ने पुलिस को 24 घंटे का समय दिया गया कि वह गांधीनगर एसएचओ अरुण जंवाल और दो अन्य पुलिसकर्मियों को सस्पेंड करें। बढ़ेत दबाव के बाद पुलिस नरम पड़ी और अब समझौते की संभावना बढ़ गई है।
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