फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जेडीए की अपील रद्द, हर्जाना

विज्ञापन
विज्ञापन
जम्मू। मुख्य न्यायाधीश एमएम कुमार और न्यायाधीश मुज्जफर हुसैन अत्तार की खंडपीठ ने जेडीए की अपील को रद्द करते हुए दस हजार रुपये हर्जाना भरने का फैसला सुनाया है। जेेडीए ने सिंगल बेंच के आदेश पर आपत्ति जताते हुए खंडपीठ में अपील की थी। हर्जाना डिमांड ड्राफ्ट के तौर पर याची को देने के आदेश भी दिए। सिंगल बेंच के आदेश के अनुसार जेडीए ने याची के प्लाट होने का दावा खारिज नहीं किया है। केवल जेडीए के तत्कालीन वाइस चेयरमैन द्वारा की गई धांधलियों के कारण अलाटमेंट के दस्तावेज की जांच हो रही थी जिसके कारण याची को अलाटमेंट का फालोअप एक्शन नहीं हो पाया है। अब जेडीए इस पोजीशन में है कि वह एक्शन ले सके। याची का प्लाट है। इस दावे को जेडीए ने मंजूर किया। समय के आधार पर दी गई लीज के दस्तावेज और अलाटमेंट प्रक्रिया, अलाटमेंट पत्र की जिम्मेदारियों को निभाना बाकी है। ऐसा आदेश जारी किया जाए कि जेडीए रूपनगर मेें याची को प्लाट अलाट करे।
विज्ञापन

खंडपीठ ने जेडीए की अपील को रद्द करते जेडीए के एडवोकेट आदर्श शर्मा की दलीलों पर गौर किया। खंडपीठ ने पाया कि पूर्व वाइस चेयरमैन असलम कुरैशी ने कई प्लाट अवैध तरीके से अलाट कर दिए। पूर्व उपमुख्यमंत्री ने आवास एवं शहरी विकास विभाग के साथ 26 अप्रैल, 2012 को बैठक की। बैठक में नवंबर, 2001 से लेकर जून, 2003 में जेडीए के बोर्ड आफ डायरेक्टर की 73वीं बैठक का जिक्र किया और अलाटमेंट पर रिपोर्ट पेश करने के आदेश दिए। याची मृदुला शर्मा के वकील रजनीश रैना ने कोर्ट में बताया कि प्लाट पाने वाले कई लोगों के पास उनका अधिकार भी है। याची मृदुला वैध तरीके से भी प्लाट हासिल नहीं कर सकी। खंडपीठ ने पाया कि मौजूदा अपील में तर्क कमजोर है।
याची मृदुला प्लाट पाने की पूरी तरह से हकदार है। उसने 2002 में नकद भुगतान भी कर दिया। जेडीए भी मानता है कि प्लाट का अलाटमेंट है। ऐसे में अपील कमजोर है और जेडीए को दस हजार हर्जाना भी देना होगा। जेएनएफ
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें