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15 हजार करदाताओं पर 1147 करोड़ बकाया

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जम्मू। रियासत में पंद्रह हजार से अधिक टैक्स डिफाल्टरों के पास 1147 करोड़ रुपये से अधिक की देनदारी है। विधानसभा में वित्त विभाग की अनुदान मांगों में कटौती प्रस्तावों का उत्तर देते हुए वित्त मंत्री अब्दुल रहीम राथर ने सदन को यह जानकारी दी। वित्त मंत्री राथर ने कहा कि रियासत में 15 हजार 139 टैक्स डिफाल्टर चिह्नित हैं। चर्चा के बाद विधायकों ने कटौती प्रस्ताव वापस ले लिए और वित्त विभाग के 11 हजार 170 करोड़ 28 लाख रुपये की अनुदान मांगों को विधानसभा से मंजूरी मिल गई। योजना विकास विभाग की 3542.19 करोड़ की अनुदान मांगों को भी सदन ने मंजूर कर लिया। समय के अभाव में योजना मंत्री अजय सडोत्रा के बदले वित्त मंत्री ने ही उत्तर दिया।
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वित्त मंत्री राथर ने कहा कि कश्मीर की तुलना में जम्मू से अधिक टैक्स संग्रह हुआ है। राथर ने कहा कि हालांकि आंतरिक संसाधन बढ़ाने में पूरी रियासत का योगदान है। उन्होंने क्षेत्रीय भेदभाव के आरोपों को भी खारिज किया। लखनपुर में वसूला जाने वाला टैक्स पूरे रियासत के लिए है और वहां सभी टैक्स देते हैं। प्रवेश कर से 140 करोड़ की वसूली हुई। मोटर स्पिरिट टैक्स से 672 करोड़ की आमदनी हुई। कई बहुराष्ट्रीय कंपनियों ने कश्मीर से अपने डिपो हटाकर जम्मू में शिफ्ट कर लिया है। इन कंपनियों ने 648 करोड़ रुपये का टैक्स भरा है।
राथर ने कहा कि टैक्स डिफाल्टरों के खिलाफ अभियान चलाया जा रहा है। इसमें कोई समझौता नहीं होगा। वाणिज्य कर विभाग ने इस साल दिसंबर तक 41.86 करोड़ की वसूली की है। टैक्स डिफाल्टरों के संपत्ति जब्त किए जाने का भी प्रावधान है। हाईकोर्ट भी इस मामले की मानीटरिंग कर रहा है। रियासत में डीलरों और कर्मचारियों को जरूरी सुविधाएं भी मुहैया करा रही है। विभाग का कंप्यूटरीकरण हुआ है। ई पेमेंट और ई रजिस्ट्रेशन की सुविधा है। 2008-9 में टैक्स से 2683 करोड़ की आय हुई थी जो अब बढ़कर 6700 करोड़ पर पहुंच गई है। वैट में आय 594.24 करोड़ से बढ़कर 1475.26 करोड़ पर पहुंची।
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