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विज्ञान, तकनीक विकास में सहयोग करें कारपोरेट

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जम्मू। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा है कि पूरी दुनिया विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में भारत की उल्लेखनीय उपलब्धियों की कायल है। परमाणु ऊर्जा और उच्च ऊर्जा भौतिकी में देश ने अहम स्थान हासिल किया है। दुनिया भर के वैज्ञानिकों की भारत में दिलचस्पी बढ़ रही है। फास्ट ब्रिडर रियेक्टर के विकास में भारत में हो रहे काम को दुनिया गौर से देख रही है। उन्होंने उम्मीद जताई कि कालापक्कम में प्रोटोटाइप का निर्माण इस वर्ष पूरा हो जाएगा। इसके बाद भारत विश्व के उन चुनिंदा देशों में शुमार हो जाएगा, जिन्हें न्यूक्लियर तकनीकी में महारत हासिल है। इससे प्रदूषण मुक्त इलेक्ट्रिक पावर के क्षेत्र में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि विज्ञान और तकनीक के बजट में बढ़ोतरी जरूरी है। यह कुल सकल घरेलू उत्पाद का कम से कम दो प्रतिशत होना चाहिए। साउथ कोरिया के जीडीपी का अधिक प्रतिशत विज्ञान पर जाता है। उन्होंने कारपोरेट जगत से विज्ञान और तकनीकी के विकास में सहयोग की अपील की। 101वीं विज्ञान कांग्रेस के उद्घाटन भाषण में प्रधानमंत्री ने चांद और मंगल मिशन में उपलब्धियों की भी चर्चा की। तरल हाइड्रो इंजन विकसित करने के लिए इसरो को बधाई भी दी।
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उन्होंने कहा कि मौसम विज्ञान के क्षेत्र में देश के काफी उन्नति की है। उड़ीसा के तूफान के बारे में भविष्यवाणी सही साबित हुई। इस क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय जगत से हम आगे चल रहे हैं। देश के पास वैसी तकनीक हैं, जिससे हम समुद्री तूफान की सूचना 13 मिनट के अंदर दे सकते हैं। एक दशक में इलेक्ट्रानिक और सौर ऊर्जा के क्षेत्र में कई नेशनल मिशन चलाए गए। नई दवा की खोज के क्षेत्र में भी उपलब्धियां हासिल हुई हैं। मलेरिया के लिए रोटा वाइरस वैक्सीन एक महत्वपूर्ण ईजाद है।
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