श्रीनगर। सरकार ने साफ कर दिया की काम नहीं तो वेतन नहीं, की नीति पर सख्ती से अमल किया जाएगा। यह घोषणा शनिवार को विधानसभा के भीतर वित्तमंत्री अब्दुल रहीम राथर ने की। उन्होंने हड़ताल को बढ़ावा देने वाले कर्मचारियों के खिलाफ सख्त रवैया अपनाने की भी चेतावनी दी।
राथर ने कर्मचारियों की हड़ताल पर स्पष्ट किया कि यूनियन नेताओं द्वारा नई नई मांगों को पेश कर देने के कारण यह मामला पेचीदा बनता जा रहा है। सरकार टकराव नहीं चाहती लेकिन कर्मचारी नेता मामले को सुलझाने की बजाए इसको उलझाने को तरजीह दे रहे हैं। हड़तालोें से मामले सुलझते नहीं, उलझते हैं, सरकार ऐसा नहीं चाहती। राथर ने कहा कि सरकार के गठन के बाद ही उन्होंने कर्मचारी नेताओं को बुलाकर उनसे हड़ताल का कारण पूछा था। केंद्र सरकार के छठे वेतन आयोग की सिफारिशों की तर्ज पर राज्य कर्मचारियों ने उनके सामने मांगें रखीं। उनमें से अधिकतर मांगों को कई बैठकों के बाद मान भी लिया गया। सरकार ने अन्य मांगों पर विचार करने के लिए कैबिनेट सब कमेटी का गठन किया और यूनियन नेताओं के साथ कई बैठकें भी कीं। कर्मचारियों द्वारा नई -नई मांगें उठाते रहने के बाद कर्मचारी काम की बजाए हड़तालों की ओर चले गए। मसले के हल के लिए हाल ही में कर्मचारी नेताओं के साथ ताजा बैठक का जिक्र भी राथर ने किया। उन्होंने बताया कि गत 17 तथा 27 सितंबर को कर्मचारियों के साथ हुई बैठक में एक साथ कई मांगों को मान लेने का दबाव सरकार पर डाला गया। कभी ईद से पहले तो कभी दरबार मूव से पूर्व इनको मान लेने का अल्टीमेटम दिया गया। सरकार ने उनकी न मानी गई मांगों पर बातचीत जारी रखने का विचार प्रकट किया लेकिन कर्मचारी फिर सड़कों पर उतर आए जिसके कारण सरकारी कामकाज बुरी तरह प्रभावित रहा। उन्होंने कर्मचारियों की रिटायरमेंट की उम्र को बढ़ाए जाने की मांग जिक्र भी किया। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों का एक बढ़ा वर्ग इस मांग का विरोध कर रहा है जबकि सरकार ने राज्य के हजारों बेरोजगार युवकों की समस्या को भी ध्यान में रखना है। उन्होंने यह फैसला सदन के सदस्यों पर छोड़ा दिया। अगर सभी दलों इस पर सहमति जताते हैं तो सरकार इस पर भी विचार कर सकती है।
उन्होंने सरकार का पक्ष मजबूती के साथ रखते हुए कहा कि अगर काम नहीं तो वेतन किस बात का। सरकार नियमों को तोड़ आम जनता के लिए मुसीबतें खड़ी करने वाले कर्मचारियों के खिलाफ सख्त रवैया अपनाएगी। इससे पूर्व एक दर्जन से भी अधिक सदस्यों ने बहस में भाग लेकर अपने विचार प्रकट किए।