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उमर कभी गुगली पर चकित हुए तो कभी सवालों के बाउंसर पर सिक्सर मारा

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जम्मू। प्रतिभा सम्मान समारोह में आए छात्र मुख्यमंत्री से सीधे संवाद का मौका पाकर निहाल थे। इस बाबत न तो पहले से कोई सूचना थी और न ही तैयारी। इसके बावजूद बच्चों के सवाल इस बात की पुष्टि करते थे कि आने वाली पीढ़ी बहुत ही प्रतिभावान है। मुख्यमंत्री यूथ को रियासत का असली आर्किटेक्ट कहते हैं। बच्चे उनके इस यकीन पर खरे उतरे। मंच पर बैठे लोग रियासत का वर्तमान थे और उनसे मुखातिब था रियासत का भविष्य। उमर के साथ सवाल-जवाब कुछ इस तरह हुए कि कभी वे बोल्ड होते दिखे तो कभी सवालों की गेंद का मैदान के बाहर पहुंचा दिया।
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जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा
एक छात्र के सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि जम्मू कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा है। यह जरूरी नहीं कि स्थानीय आईएएस, आईपीएस और आईएफएस को राज्य में ही अपनी सेवाएं देने का मौका मिले। जब सेवा भारतीय है, तो यह भारत के किसी भी हिस्से में दी जा सकती है। उमर ने स्पष्ट किया कि सिर्फ जम्मू कश्मीर का कैडर नहीं मिलने पर भारतीय पुलिस अथवा प्रशासनिक सेवा छोड़ना जायज नहीं है। उनकी कोशिश रहेगी कि वह प्रधानमंत्री से मुलाकात कर इस मसले पर चर्चा करेंगे।
संगीत का कोई मजहब नहीं होता
श्रीनगर में लड़कियों के रॉक बैंड को फतवे के बाद बंद किए जाने के सवाल पर उमर ने कहा कि सरकार उनको संरक्षण देना चाहती थी लेकिन लड़कियों ने पारिवारिक दबाव में इसे बंद किया। हालांकि फतवा जारी करने वालों ने बाद में खुद संगीत का मजा लिया। यह बात अखबारों की सुर्खियां भी बनी। उमर ने स्पष्ट किया कि संगीत का कोई धर्म अथवा मजहब नहीं होता। फतवा जारी करने वालों ने तो जुबिन मेहता के कार्यक्रम का भी विरोध किया था लेकिन हमने करवाया।
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सियासत के सवाल पर भौचक्के रह गए
एक छात्रा ने जब मुख्यमंत्री से सियासत की व्याख्या करने संबंधी सवाल पूछा, तो उमर अब्दुल्ला भौचक्के रह गए। उनका कहना था कि आज तक ऐसे सवाल का उनको सामना नहीं करना पड़ा। उन्होंने छात्रा से दोबारा पूछा कि आखिर वह पूछना क्या चाहती हैं। इस पर छात्रा ने कहा कि वह जानना चाहती है कि मुख्यमंत्री का सियासत में आने का क्या उद्देश्य है। क्यों लोग बच्चों को सियासी लीडर नहीं बनाना चाहते। उमर ने स्वीकार किया कि सियासत में कुछ लोग पैसा बनाने, कुछ ताकत का इस्तेमाल करने, कुछ शुरुआत खिदमत करने के इरादे से करते हैं, लेकिन बाद में भटक जाते हैं लेकिन यह बात हर सियासतदां पर लागू नहीं होती। लेकिन सियासतदां बदनाम अधिक हो गए हैं। अभिभावक बच्चों को सियासत में आने की सलाह नहीं देते, देश के बेहतर भविष्य के लिए आईएएस, आईपीएस, केएएस की तरह अच्छे सियासतदानों का भी सियासत में आना जरूरी है।
आरक्षण एक अहम् मुद्दा
आरक्षण संबंधी एक छात्रा के सवाल पर उमर ने स्पष्ट किया कि यह सिर्फ किसी परिवार अथवा व्यक्ति को एक दफा मिलना चाहिए। हालांकि यह उनका व्यक्तिगत मत है, इस सवाल का जवाब वह बतौर मुख्यमंत्री, नेशनल कान्फ्रेंस के सदर अथवा विधायक के नाते से नहीं दे रहे। आरक्षण की व्यवस्था सुविधाओं से वंचित तबके के सामाजिक उत्थान के लिए की गई है। यह जरूरी भी है।
समाधान सिर्फ सरकारी नौकरी नहीं
राज्य में बड़े उद्योगों का रुझान नहीं बढ़ने की हकीकत को भी उमर ने स्वीकार किया। एक छात्र द्वारा बेरोजगारी के सवाल के जवाब में उमर ने कहा कि रोजगार का समाधान सिर्फ सरकारी नौकरी नहीं है। राज्य में लागू उड़ान और हिमायत योजनाओं का युवाओं को फायदा उठाना चाहिए। उन्हें अफसोस है कि इन दोनों योजनाओं की मांग पूरे देश में हर राज्य की सरकारें कर रही हैं।
जेटली मुजफ्फरनगर क्यों नहीं गए
राज्यसभा में नेता विपक्ष अरुण जेटली को किश्तवाड़ दंगे के बाद दौरा करने की इजाजत नहीं देने का सवाल एक छात्रा ने उमर से किया। मुख्यमंत्री का जवाब था कि उन्होंने सही फैसला रियासत के अमन और भाईचारे के हित में लिया था। सिर्फ जेटली को ही नहीं, उन्होंने उप मुख्यमंत्री और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष से भी किश्तवाड़ नहीं जाने का आग्रह किया था। जेटली अगर सियासत नहीं कर रहे थे तो वे मुजफ्फरनगर क्यों नहीं गए। कश्मीर को ही क्यों मुद्दा बनाया जाता है।
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