जम्मू। जम्मू विकास प्राधिकरण की खाली जमीन पर समय रहते अतिक्रमण नहीं हटाने के बाद आज नौबत यह आई है कि जेडीए के अधिकारियों को जमीन छुड़वाने के लिए गुप्त अभियान चलानी पड़ रही है। जेडीए की 2855 कनाल जमीन पर अतिक्रमणकारियों ने कब्जा जमा रखा था, जिसे हटाया नहीं जा सका है। मुश्किल परिस्थितियों में मात्र 1721 कनाल जमीन ही छुड़वाई जा सकी।
शहर के सिद्दड़ा, रंगूड़ा, मजीन, गोल गुजराल, बेलिचराना, सुजवां, डिल्ली आदि इलाकों में जम्मू विकास प्राधिकरण की जमीन है। कई वीसी आए और चले गए। प्रशासनिक अधिकारियों तथा खिलाफ वर्जी विंग ने अपनी जमीन में कोई तारबंदी भी नहीं की। उच्चाधिकारी तथा मंत्री जमीन खाली करवाने के लिए सही मौके की तलाश करते रहे। उधर लोगों ने जेडीए की जमीन पर कब्जे जमा लिए। अब जेडीए को मुसीबतों को झेलने के लिए मजबूर होना पड़ता है। जेडीए की ताजा रिपोर्ट में नजूल विभाग से 35353 कनाल जमीन 28 जनवरी 1973 में जेडीए की ट्रांसफर हुई थी, इसके अलावा रोशनी एक्ट के तहत 40480 कनाल जेडीए को मिली थी। कुल जेडीए की 75,833 कनाल 5 मरला 261 स्क्वेयर फीट जमीन है। इसमें 2855 कनाल जमीन पर अवैध कब्जे हैं। मात्र 1721 कनाल जमीन को ही छुड़वाया जा सका है। कई परिस्थितियों में लोगों ने कालोनी की तर्ज पर अतिक्रमण कर लिया था, जिन्हें वहां से हटाना नामुमकिन हो गया। तब सरकार को 742 कनाल जमीन पर बनी अवैध कालोनियों को नियमित करके उन्हें लोगों के सुपुर्द करना पड़ा है। अब जेडीए के पास मात्र 4062 कनाल जमीन खाली और उपलब्ध है। अगर समय रहते इसे कवर नहीं किया गया तो वह दिन दूर नहीं जब यह भी हाथ से खिसक जाएगी।