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पूर्व आतंकियों को दिल्ली ले गई एसएसबी

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जम्मू। उत्तर प्रदेश के महाराजगंज में नेपाल सीमा पर पकड़े गए दो पूर्व आतंकी परिवार के सभी सदस्यों को एसएसबी पूछताछ के लिए दिल्ली ले गई है।
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पूछताछ और वेरिफिकेशन के बाद उन्हें जम्मू कश्मीर पुलिस को सौंपा जा सकता है। इस बीच कुपवाड़ा एसपी इरशाद ने कहा है कि उन्हें इस संबंध में अब तक कोई जानकारी नहीं है। एसएसबी ने दो पूर्व आतंकियों को महाराजगंज-नेपाल सीमा पर तब पकड़ा था, जब वे भारतीय सीमा में प्रवेश कर रहे थे। कश्मीर के आईजी अब्दुल गनी मीर ने कहा कि पुनर्वास नीति के तहत पूर्व आतंकियों की वापसी के मामले को सीआईडी ही देखती है। सीआईडी के आईजी श्रीनिवासन से संपर्क नहीं हो पाया।
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पुलिस सूत्रों के मुताबिक एसएसबी ने मुजफ्फर अहमद और मोहम्मद रसीद नामक दो पूर्व आतंकियों को जांच के दौरान संदिग्ध पाए जाने पर पकड़ा था। इन लोगों ने एसएसबी को बताया कि उनका स्थायी निवास कुपवाड़ा रहा है। इनके साथ उनकी पत्नियां और चार बच्चे भी पीओके से लौट रहे थे। आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिद्दीन 1990 में इन दोनों को पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर ले गया था। रियासत की पुनर्वास नीति के बाद इन लोगों ने कश्मीर लौटने का फैसला किया। दलालों को पैसे देकर पहले कराची और बाद में काठमांडू पहुंचे। काठमांडू से उत्तर प्रदेश से सटने वाली नेपाल सीमा पर आए। गौरतलब है कि इससे पहले बिहार के मधुबनी में चार पूर्व आतंकी अपने परिवार के साथ कश्मीर वापसी के क्रम में पकड़े गए थे। इनके साथ पत्नियां और बच्चे भी थे। इनकी कुल संख्या बारह थी। बाद में मधुबनी पुलिस ने इन्हें जम्मू कश्मीर पुलिस को सौंप दिया था। लियाकत अली शाह की गिरफ्तारी के मामले पर भी सियासी तूफान खड़ा हुआ। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने इस मामले पर दिल्ली पुलिस की आलोचना करते हुए कहा था कि लियाकत की वापसी की जानकारी उन्हें थी। मुख्यमंत्री ने इस मामले को केंद्र सरकार के साथ उठाया था। अब एनआईए इस मामले की जांच कर रही है। इन विवादों के बीच दो और पूर्व आतंकियों की परिवार समेत वापसी अभी जांच की प्रक्रिया से गुजर रही है।
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