जम्मू। पाकिस्तान की कोट लखपत जेल समेत अन्य जेलों में 11 साल तक सजा काट चुके जम्मू निवासी विनोद साहनी का दावा है कि सरबजीत की मौत एक सोची समझी साजिश का परिणाम है। फांसी की सजा पाए हुए कैदी को पूरी सुरक्षा के साथ रखा जाता है। ऐसे में पाकिस्तान के कैदियों के हमले का सवाल नहीं उठता। उनका कहना है कि अभी भी पाक की जेलों में दो हजार से ज्यादा कैदी बंद है। यदि भारत सरकार ने कठोर कदम न उठाया तो चमेल और सरबजीत सिंह से शुरू हुआ सिलसिला आगे भी जारी रहेगी। जासूसी करने के आरोप में 1977 से लेकर 1988 तक सजा काट चुके साहनी ने बताया कि पाकिस्तान में भारतीय कैदियों से अलग बर्ताव होता है और उन्हें कठोर यातनाएं दी जाती है। जेल स्टाफ उनसे जानवरों की तरह बर्ताव करता है। पाक जेल स्टाफ द्वारा कैदी देवी चंद की हत्या किए जाने का मंजर साहनी ने खुद अपनी आंखों से देखा था।
जम्मू के बख्शी नगर निवासी विनोद साहनी पाकिस्तान में भारत के लिए जासूसी करने के आरोप में 1977 से लेकर 1988 तक सजा काट चुके है। अमर उजाला से खास बातचीत में साहनी ने बताया कि अब भी पाकिस्तान की जेलों में उनके साथ हुए जुल्म उनके रोंगटे खड़े कर देते है। साहनी ने बताया कि पाकिस्तान में 11 साल तक उनके शरीर पर आठ किलो की बेड़ियां पहनाकर कोट लखपत जेल से लेकर गोरा जेल, सियालकोट जेल, साहीबल (काला पानी) सेंट्रल जेल में रखा गया। बेड़ियों की वजह से उनके पैरों में कीड़े तक पड़ गए।
अन्य भारतीय कैदियों से भी ऐसा ही बर्ताव होता था। सरबजीत को गहरी साजिश रच कर मारा गया है। साहनी कहते है कि 16 अप्रैल 2008 को उन्होंने प्रधानमंत्री डा. मनमोहन सिंह को खुला पत्र लिखकर सरबजीत सिंह की पाकिस्तान की जेल में हत्या किए जाने की आशंका जता दी थी। इसलिए उसे जिंदा नहीं छोड़ना चाहते थे।