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धर्म के नाम पर छात्राओं को धमकाना गलत

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जम्मू। ग्रैंड मुफ्ती बशीरूद्दीन अहमद के द्वारा प्रगाश बैंड की छात्राओं को दिए गये फतवे पर विश्वविद्यालय की छात्राओं ने आलोचना करते हुए कहा है कि शरीयत और धर्म क ा इस्तेमाल करते हुए युवा पीढ़ी की प्रतिभा को दबाने की कोशिश कर रहे हैं, जो पूरी तरह से गलत और नाजायज है। जम्मू विश्वविद्यालय से उर्दू में पीजी कर रही छात्रा यासमीन कौसर का कहना है कि शरीयत के मुताबिक लड़कों और लड़कियों दोनों को गाने-नाचने पर सख्त पाबंदी है लेकिन हमेशा लड़कियों को ही इसका शिकार होना पड़ता है। कौसर का कहना है कि अगर शरीयत दोनों को बराबर का दर्जा देता है तो फतवा लड़कों के ऊपर भी लागू होना चाहिए।
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वहीं अन्य पीजी उर्दू की छात्रा जैहनव बीबी का कहना है कि इस्लाम मजहब की अपनी जगह है और इस्लाम कभी भी किसी की तरक्की में रुकावट पैदा नहीं करता है। जैहनव का कहना है कि फेसबुक पर लोग जानबूझ कर धर्म का इस्तेमाल करते हुए उनकी प्रतिभा को दबाया हैं। जैहनव ने शेर के जरिये अपनी बात को सामने रखते हुए कहा
जिहालत ऐब है इस्लाम के आयन में, इल्म हासिल करो चाहे मिले वो चीन में... । बीबी ने कहा, इस्लाम हर किसी को तरक्की पर चलने की बात कहता है न कि उनकी तरक्की में रुकावट डालना। वहीं मनोविज्ञान की छात्रा शीतल ने कहा, प्रगाश बैंड के साथ इस तरह से फतवे जारी करना गलत बात है। उनका कहना है कि अगर इस तरह से प्रगाश बैंड पर बैन लगाया है तो वहां पर अन्य स्थापित बैंड पर भी फतवा जारी करना चाहिए। वहीं सिविल सर्विस क ी तैयारी कर रहे सुनीश शान ने कहा इंसान धर्म के लिए है या धर्म इंसान के लिए है। शान ने कहा आम लोग अगर आगे बढ़ने का काम करते हैं तो उन पर फतवा जारी कर दिया जाता है और रईसजादे लोग इस तरह से करते हैं तो तब फतवा जारी नहीं होता है। इस तरह करना गलत बात है और उन छात्राओं की उम्र अभी सिर्फ 14-15 साल है और उन पर इस तरह से फतवा जारी करने से वह जिंदगी भर आगे बढ़ने की कोशिश नहीं करेंगी और परदे में ही सिमट कर रह जाएगी।
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