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वेलेंटाइन डे पर बाजार में बिक रहे तरह-तरह के दिल

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जम्मू। ‘पोथी पढ़ी-पढ़ी जग मुआ पंडित भया न कोय, ढाई आखर प्रेम के पढ़े सो पंडित होए’। संत कबीर का यह दोहा अपने आप में सारे सवालों का उत्तर है। प्रेम ही ब्रह्मांड का सार है। वह चाहे देवता हो, मानव हो, संत या पशु पक्षी, हर एक प्रेम की नाजुक डोरी से बंधा हुआ है। प्रेम बिन सब सून। राधा, मीरा, सुदामा, रसखान, तुलसी, सूरदास, बाबा बुल्ला और अनगिनत नाम। प्रेम ही मानव को अन्य लोगों से ऊंचा और महान बनाता है। प्रेम अगर भटक जाए तो फिर उससे भयानक रूप शायद ही कहीं देखने को मिलता हो। वेलेंटाइन डे पर बाजार में तरह-तरह के दिल बिक रहे हैं।
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प्रेम के लिए वैसे कोई भी दिन या सप्ताह या साल नहीं होता लेकिन वसंत ऋतु हमेशा प्रेम के लिए जानी जाती है। इसी ऋतु में प्रेम का उत्सव मनाया जाता है जो आधुनिक रूप में वेलेंटाइन डे कहा जाता है। मजे की बात यह है कि इस साल बसंत का पर्व भी वेलेंटाइन वीक के दौरान ही आ रहा है। वेलेंटाइन डे भले ही चौदह फरवरी को होता हो, लेकिन इसका खुमार सात फरवरी से ही शुरू हो जाता है। सात से तेरह फरवरी तक हर दिन किसी खास विषय को समर्पित होगा। यानी वेलनटाइन डे से पहले सात दिन। सात यानी सात जन्मों का प्रेम, विवाह के सात फेरे, सरगम के सात सुर आदि। प्रेम के इस खास मौके के लिए युवाओं ने अभी से तैयारी कर दी है। दिल्ली में दामिनी की घटना और कट्टरपंथियों की धमकियों के चलते प्रगाश के बिखराव के बाद युवाओं ने प्रेम के इस सप्ताह को और शिद्दत के साथ मनाने का प्रण लिया है। हर साल सात दिनों का थीम क्या होगा तो तय किया जाता है। यही कारण है कि हर वेलेंटाइन डे से पहले सात दिनों का थीम अलग-अलग होता है।
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