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जस्टिस वर्मा की रिपोर्ट से संतुष्ट नहीं हैं युवतियां

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जम्मू। सरकार को सौंपी गई जस्टिस वर्मा कमेटी की रिपोर्ट की सिफारिशों को लेकर युवतियों में निराशा है। युवतियों का कहना है कि जो कुछ सिफारिशों में है वह पर्याप्त नहीं है। इससे न ही युवतियों में सुरक्षा का भाव पैदा होगा और न ही इससे बलात्कार जैसे घिनौने अपराधों पर रोक लग पाएगी। जम्मू विवि के लॉ स्कूल के तीसरे वर्ष की छात्रा महक महाजन सिफारिशों को उचित नहीं मानती हैं। उनका कहना है कि जो प्रावधान रखे गए हैं उससे अपराधी मानसिकता को रोका नहीं जा सकता है। उम्रकैद कहीं न कहीं अपराधी के दिमाग में कानून के खौफ को कम करता है।
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छात्रा तन्वी कोतवाल के अनुसार, उम्रकैद की सजा झेल रहा कैदी अगर जेल में अच्छा व्यवहार रखता है तो उसकी सजा माफ हो जाती है। लॉ की अन्य छात्रा तन्वी शर्मा भी रिपोर्ट से सहमत नहीं हैं। उसने कहा दामिनी गैंगरेप के बाद देश के अन्य हिस्सों के साथ-साथ जम्मू में भी सामूहिक बलात्कार के कई मामले आए हैं। अन्य छात्रा आसमां और रचिता का कहना था कि रिपोर्ट में यह कहा गया है कि बलात्कारी को रसायनों से नपुंसक करना मानवाधिकारों के खिलाफ है, लेकिन बलात्कार भी तो मानवाधिकारों के खिलाफ है। आकृति सिंह ने कहा कि यूएसए, यूके और अरब देशों में सख्त कानून होने की वजह से वहां पर महिलाओं के प्रति अपराध कम होते हैं। आकृति ने कहा हमारी सरकार और जस्टिस वर्मा की रिपोर्ट को चाहिए कि वह सख्त सजा का प्रावधान बनाये जिससे लोगों के दिमाग में डर बैठे।
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