जम्मू। दीवाली पर ध्वनि प्रदूषण और वायु प्रदूषण और बढ़ गया है। राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से पांच दिनों तक कई गई मािनटरिंग में यह बात स्पष्ट हुई है। पटाखों से निकलने वाली हानिकारक नाइट्रोजन गैस, सल्फर और मिट्टी के बारीक कण हवा में जहर बनकर उड़े और सांस के जरिए शरीर में चले गए। इस बार दीवाली पर ध्वनि और वायु प्रदूषण सामान्य से कहीं अधिक रहा। स्वाभाविक है कि इसका बुरा प्रभाव आम लोगों, वन्य जीवों पर पड़ेगा।
वायु प्रदूषण के लिए दीवाली के दिन, दो दिन पहले और दो दिन के बाद रेसपायरेबल डस्ट मशीन के माध्यम से नरवाल, एसपीसीबी और एमए स्टेडियम में मानटरिंग की गई। वहीं ध्वनि प्रदूषण के लिए गांधी नगर / गोल मार्केट, बख्शी नगर, रेहाड़ी चुंगी और परेड में मानटरिंग की गई। सस्पेंडेड पार्टीकुलेट मैटर (एसपीएम) यानी नेशनल हाइवे में उड़ने वाली मिट्टी के कण श्वास नली के जरिए शरीर के अंदर जा चले गए। लोगों ने दस करोड़ रुपये के पटाखे जला दिया। पटाखों के मसाले जलने के बाद हवा में जहर बनकर घुल गए। लगातार बढ़ते वायु प्रदूषण को चुनौती के रूप में स्वीकार करते हुए अभी से संभलने की जरूरत हैं। क्योंकि सांस की बीमारियों तथा स्किन की अलर्जी से ग्रस्त लोगों को आने वाले समय में दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। दीवाली पर ध्वनि प्रदूषण अधिकतम 90.5 डेसिबल दर्ज किया गया है। जोकि 65 डेसिबल होना चाहिए। उधर, राज्य प्रदूषण बोर्ड के चेयरमैन लाल चंद का कहना है कि ध्वनि प्रदूषण बढ़ने से रात को नींद उखड़ना, डर लगना, अपनी बात दूसरों को बताने के लिए गले पर दबाव डालना है। उन्होंने बताया कि दीवाली लेट होने के कारण मौसम खुश्क हो गया था और शांदियों का सीजन तथा सचिवालय का जम्मू होना भी आंकड़े को दोगुना करने के लिए काफी साबित हुए।