जम्मू। पैसेंजर किराया बढ़ाने की मांग करते हुए आल ट्रांसपोर्टरों ने रियासत भर में सोमवार को चक्का जाम रखा, त्योहार की छुट्टियों के बाद सही मायने में सचिवालय भी इसी दिन खुला था। चक्का जाम से सुबह आफिस, शाम को घर लौटने वालों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। लखनपुर से लेकर श्रीनगर तक सत्तर हजार वाहन सोमवार को पूरी तरह से बंद रहे। सड़क किनारे अधिकतर लोग जहां पैदल चलने को मजबूर हो रहे थे, वहीं बहुत सारे लोग लिफ्ट मांग कर अपने गंतव्य तक पहुंचने के प्रयास में रहे। रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड और बस स्टाप पर लोगों की कतारें मेटाडोर का इंतजार करती रहीं।
दो माह पहले पांच रुपये बढ़ोतरी के बाद डीजल की कीमत 49 रुपये हो गई। इसके विरोध में आल जेएंडके ट्रांसपोर्ट वेलफेयर एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने पैसेंजर किराये में पचास फीसदी बढ़ाने की मांग की। इसके लिए प्रपोजल दी थी, जिस पर कई बैठकों में चर्चा हुई। सरकार ने आश्वासन देकर भी अधिसूचना नहीं निकाली। सचिवालय आने के बाद जब अधिसूचना नहीं निकली तो ट्रांसपोर्टरों ने एकजुट होकर सोमवार को प्रस्तावित हड़ताल की। जिसे पूरी तरह से कामयाब बनाया गया। हड़ताल के असर में नौकरी-पेशे, स्कूल, कालेज तथा विभागों में पहुंचने वाले लोगों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। बस स्टैंड से कठुआ, राजोरी, पुंछ, उधमपुर, कटरा, श्रीनगर के लिए जाने वाली निजी बसों के अलावा आटो रिक्शा, टैक्सी, मिन्नी बस और मेटाडोर के चक्के पूरी तरह से जाम रहे। एसोसिएशन के महासचिव विजय कुमार शर्मा का कहना है कि सरकार ने उनकी जायज मांग को पूरा नहीं किया है, जबकि ट्रांसपोर्ट वर्ग भी चुनौतियों से जूझ रहा है। उन्होंने बताया कि अगर एक सप्ताह के अंदर उनकी मांगों को नहीं माना तो ट्रांसपोटर्स हक के लिए अनिश्चितकालीन हड़ताल कर देंगे।
रेल यात्रियों को रही हड़ताल से परेशानी
ट्रांसपोर्टरों की हड़ताल के कारण रेल यात्रियों को स्टेशन पहुंचने मेें खासी परेशानियों का सामना करना पड़ा। यात्री लिफ्ट लेकर अपने गंतव्य स्थान पर पहुंचे। अपना सामान लेकर कई यात्री नजदीक के ही होटलों में ठहर गए। मंगलवार को ट्रांसपोर्ट दोबारा चलने के बाद ही यात्री अपने दूर के स्टेशनों पर जाएंगे। सुबह से ही सड़कों पर कोई भी सार्वजनिक वाहन नहीं चले। स्टेशन के बाहर आते ही यात्रियों को मेटाडोर, टैक्सी और आटो तक नहीं मिले। जम्मू में सुबह अधिकतर ट्रेनेें पहुंचती हैं। कई यात्री इस हड़ताल से अवगत नहीं थे। इससे उन्हें काफी परेशानी उठानी पड़ी। जम्मू से कश्मीर घाटी, डोडा, पुंछ, राजोरी और अन्य दूरदराज क्षेत्रों में जाने वाले लोग अपने रिश्तेदारों और संबंधियों के घर किसी तरह पहुंच पाए। कई लोग होटलों में ही ठहर गए। स्टेशन के आसपास के होटल भी भरे रहे। हालांकि कुछ ट्रेवल एजेंटों की प्राइवेट गाड़ियों ने यात्रियों कुछ राहत प्रदान की। स्टेशन से राज्य परिवहन निगम की बसें कटड़ा तक जाने के लिए कम पड़ी। ट्रांसपोर्टरों की हड़ताल के चलते सोमवार को शहर के कालेजों और स्कूलों में विद्यार्थियों की हाजिरी कम रही। अस्पतालों में भी ओपीडी में कम ही मरीज पहुंचे। इमरजेंसी में मरीजों के पहुंचने का सिलसिला जारी रहा।