जम्मू। दीवाली के बाद मुलाजिमों का आंदोलन फिर जोर पकड़ लेगा। सरकारी मुलाजिमों के विभिन्न संगठनों के अलावा एसआरटीसी के वीआरएस लेने वाले मुलाजिम भी सड़क पर उतरने की तैयारी में है।
स्टेट गवर्नमेंट इंप्लाइज ज्वाइंट एक्शन कमेटी जम्मू कश्मीर ने सरकार को मुलाजिमों की मांगों को पूरा करने के लिए 17 नवंबर तक का समय दिया हुआ है। ऐसा न होने पर 18 से आंदोलन शुरू किया जाएगा। सचिवालय घेराव का प्रयास और राज्यव्यापी काम छोड़ हड़ताल छह और सात अक्तूबर को करने के बाद मुलाजिमों के संगठन ज्वाइंट कंसल्टेटिव कमेटी (जेसीसी) ने चौदह और पंद्रह दिसंबर को राज्यव्यापी हड़ताल के लिए तैयारी शुरू कर दी है। कमेटी के सदस्य मोहम्मद गफूर डार के अनुसार रियासती सरकार कर्मचारी विरोधी नीतियां अपना रही है। सरकार ने जेसीसी के साथ कर्मचारियों की मांगों को लेकर 15 सितंबर 2011 और आठ जुलाई 2012 को लिखित में समझौता किया, लेकिन उसे तय समय पर लागू नहीं किया। अब बड़े आंदोलन के अलावा र्कोई विकल्प नहीं है।
इसके अलावा स्टेट रोड ट्रांसपोर्ट कारपोरेशन (एसआरटीसी) के वीआरएस (रिटायर) मुलाजिमों ने भी सरकार और एसआरटीसी प्रबंधन पर बकाया जारी न करने का आरोप लगाते हुए 21 नवंबर को सचिवालय घेराव करने का एलान कर दिया है। कई अन्य विभागों के कर्मचारी भी आंदोलन की तैयारी में हैं। कर्मचारियों की प्रम़ुख मांगों में अस्थायी कर्मचारियों को नियमित करने की नीति निर्धारित करने, रिटायरमेंट आयु को बढ़ाने, क्लर्काें सहित अन्य व्यवस्था के कर्मियों की वेतन विसंगतियों को दूर करने की मांग शामिल है।