यहां के दोनों लोकसभा क्षेत्रों पर रिफ्यूजी वोट बैंक इस चुनाव में निर्णायक भूमिका अदा करेगा। दोनों क्षेत्रों में इस वर्ग के तकरीबन 11 लाख 75 हजार मतदाता हैं।
राज्य के लोकतांत्रिक इतिहास में पहला मौका है जब रिफ्यूजियों ने अपने यूनाइटेड फ्रंट का गठन कर जम्मू-पुंछ लोकसभा क्षेत्र से अपने प्रत्याशी को मैदान में उतारा है।
रिफ्यूजियों के मुद्दों की कांग्रेस, नेकां, पीडीपी और भाजपा सरीखे सियासी दलों की अनदेखी के चलते इस दफा रिफ्यूजी वोट बैंक में इन दलों को सेंध लगाने में मुश्किलें आ रही हैं।
दोनों लोकसभा क्षेत्रों में रिफ्यूजी वोट बैंक ही पूर्ववर्ती चुनावों में कांग्रेस और भाजपा प्रत्याशियों की विजय और पराजय सुनिश्चित करता रहा है।
खासकर जम्मू-पुंछ लोकसभा क्षेत्र में 6.5 लाख पाकिस्तानी अधिकृत कश्मीर (पीओके) रिफ्यूजी और पचास हजार के करीब वेस्ट पाकिस्तानी रिफ्यूजी वोटरों के वोट निर्णायक साबित होंगे। इसी वजह से कांग्रेस और भाजपा सरीखे सियासी दलों ने रिफ्यूजियों के जनाधार वाले क्षेत्रों में सक्रियता बढ़ा दी है।
रिफ्यूजी वोट बैंक की परेशानी पिछले 65 साल से उनके लंबित मसलों का समाधान नहीं होना है। खास बात यह है कि वेस्ट पाकिस्तान से जम्मू कश्मीर में आए 6500 से अधिक परिवारों को आज तक राज्य की स्थायी नागरिकता नहीं मिली।
इन परिवारों के तकरीबन 75 हजार वोटर सिर्फ लोकसभा चुनाव में ही मतदान कर सकते हैं, विधानसभा चुनाव में नहीं। जबकि वेस्ट पाकिस्तान से पलायन कर पंजाब में बसे डॉ. मनमोहन सिंह देश के प्रधानमंत्री हैं। भाजपा नेता लाल कृष्ण आडवाणी देश के उप प्रधानमंत्री रह चुके हैं।