प्रदर्शन कर तत्काल आदेश को रद्द करने की उठाई मांग
संवाद न्यूज एजेंसी
उधमपुर। नायब तहसीलदार की पोस्ट के लिए उर्दू भाषा को अनिवार्य रखने के खिलाफ मंगलवार को शहर के गोल मार्किट चौक पर स्थानीय युवाओं की तरफ से जोरदार प्रदर्शन किया गया। आरोप लगाया कि जम्मू कश्मीर की नेशनल कांफ्रेंस सरकार जानबूझ कर उर्दू भाषा को अनिवार्य बनाकर जम्मू संभाग के साथ भेदभाव कर रही है। प्रदर्शन में शामिल युवाओं ने जम्मू के साथ भेदभाव बंद करो और उमर सरकार होश में आओ के जोरदार नारे लगाए।
प्रदर्शन की अगुवाई कर रहे आकाशदीप ने कहा कि जम्मू कश्मीर में हिंदी, अंग्रेजी, डोगरी, कश्मीरी और उर्दू, इन पांच भाषाओं को आधिकारिक भाषा घोषित किया गया है लेकिन इसके बावजूद नेकां सरकार ने जानबूझ कर नायब तहसीलदार की पोस्ट के लिए खासतौर पर उर्दू को अनिवार्य बना दिया है। उन्होंने कहा कि सरकार अच्छी तरह से जानती है कि जम्मू संभाग के युवा उर्दू नहीं पढ़ते हैं और कश्मीर संभाग में इसकी अधिक पकड़ है। इसलिए नेकां की उमर सरकार ने जानबूझ जम्मू संभाग के युवाओं को इस परीक्षा से बाहर रखने के लिए उर्दू को अनिवार्य बना दिया है, ताकि उर्दू का ज्ञान नहीं होने के कारण जम्मू संभाग के युवा बिना परीक्षा के ही इससे बाहर हो जाएं।
उन्होंने कहा कि जम्मू कश्मीर में अनुच्छेद 370 की आड़ में भी जम्मू संभाग के साथ इसी तरह का भेदभाव नेकां सरकार करती आई है। अब 370 हटने के बाद जम्मू संभाग को बराबर का हक मिलने की उम्मीद जगी थी लेकिन दोबारा से सत्ता में आई नेकां सरकार ने जम्मू के साथ भेदभाव का अपना एजेंडा चलाना शुरू कर दिया है। उन्होंने कहा कि ऐसी भेदभाव की राजनीति करने के लिए ही नेकां सरकार जनता की समस्याओं को छोड़कर केवल राज्य के दर्जा बहाली की मांग कर रही है।
उन्होंने कहा कि नेकां सरकार को होश में आकर काम करना चाहिए और जम्मू संभाग के साथ भेदभाव को पूरी तरह से बंद कर देना चाहिए। उन्होंने कहा कि हमारी यही मांग है कि नायब तहसीलदार की परीक्षा के लिए उर्दू की अनिवार्यता को तत्काल रद्द किया जाना चाहिए। अगर ऐसा नहीं हुआ तो आने वाले समय में युवाओं का प्रदर्शन तेज हो सकता है।