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घाटी छोड़ रहे बाहर के श्रमिक

Fri, 22 Jul 2016 11:20 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला,उध्ामपुर
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घर-परिवार छोड़ रोजीरोटी कमाने के लिए घाटी में काम करने आए बाहरी राज्यों के मजदूर अब भागने पर मजबूर हो गए हैं। कई दिनों से घाटी में बिगड़े हालातों के बीच बाहरी राज्यों के मजदूरों के लिए खाने-पीने का इंतजाम करना मुश्किल हो गया है। इसके चलते शुक्रवार को घाटी से सैकड़ों मजदूर अपने घरों के लिए रवाना हुए।
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आतंकी बुरहान वानी की मौत के बाद घाटी में बने हालातों का असर समाज के हर वर्ग पर देखने को मिल रहा है। घाटी के हालाता से सिर्फ जम्मू-कश्मीर ही नहीं, बल्कि देश के अन्य राज्यों पर भी पड़ा है। कश्मीर में हर दिन बिगड़ते हालातों के चलते बंद के कारण वहां काम करने वाले बाहरी राज्यों के श्रमिकों को भी इसका भारी खामियाजा भुगतना पड़ रहा है।

कश्मीर में पंद्रह दिनों से घाटी में बंद है। इसके चलते हजारों की संख्या में मजदूर भूख और प्यास से तड़प रहे हैं। बाहरी राज्यों के मजदूरों के पास न तो खाने को खाना है और न ही पैसा। इसके चलते घाटी से अधिकतर मजदूर अपने घर वापस जा रहे हैं।
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घाटी से उधमपुर पहुंचे श्रमिक नूर अहमद ने बताया कि वह बिहार से घाटी में काम करने गया था। पिछले कई दिनों से घाटी का माहौल पूरी तरह से बदल चुका है। बंद के कारण उनके पास न तो खाना बचा है और न ही खाना खरीदने के लिए पैसे। किसी तरह कुछ पैसों का प्रबंध कर बिहार वापस जाने का फैसला किया।

बिहार के ही एक और श्रमिक रामविलास ने बताया कि घाटी में वह सुरक्षित नहीं थे। वह घाटी से निकलकर तो आ गए हैं, पर वहां पर उनकी मदद के लिए न सरकार आगे आई और न ही प्रशासन। जैसे तैसे घाटी से निकलकर यहां पहुंचा। उन्होंने कहा कि वह अपने परिवार का पेट पालने के लिए जम्मू-कश्मीर में इसलिए आए थे क्योंकि यहां पर अन्य राज्यों के मुकाबले दिहाड़ी अच्छी मिल जाती है, पर अब कश्मीर में रहना उनके लिए मुश्किल हो गया है।
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