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Udhampur News: शिक्षिका से गजल लेखिका तक ‘अंतरा’ का प्रेरणादायक सफर

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जिले की बेटी कुसुम शर्मा ने शंकराचार्य अवाॅर्ड से लेकर कई सम्मान प्राप्त किए
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उधमपुर। जिले की जानी-मानी शख्सियत कुसुम शर्मा जिन्हें साहित्य जगत में ‘अंतरा’ के नाम से जाना जाता है शिक्षा और साहित्य-दोनों क्षेत्रों में अपनी अलग पहचान बना चुकी हैं। एक सरकारी अध्यापिका होने के साथ-साथ वह गजल लेखिका भी हैं। कुसुम को उनकी उत्कृष्ट प्रतिभा के लिए कई प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाजा गया है। वर्ष 2014 में उन्हें हरिद्वार में भगवान परशुराम की चालीसा लेखन के लिए शंकराचार्य अवाॅर्ड मिला। वर्ष 2021 में हरियाणा में उन्हें दलेची अवाॅर्ड व जोनल लेवल बेस्ट टीचर अवाॅर्ड से सम्मानित किया गया। ये सम्मान शिक्षा और साहित्य दोनों में उनके समर्पण को दर्शाते हैं। लेखन का शौक उन्हें बचपन से था लेकिन वर्ष 2019 में उन्होंने अपने जज्बातों को गंभीरता से शब्दों में ढालना शुरू किया। प्रसिद्ध गजलकार गिरधारी सिंह राठौर ने उनकी प्रतिभा को पहचानकर सही दिशा दिखाई। इसके बाद अपनी पहली पुस्तक ‘अंतरा’ प्रकाशित की, जिसे उन्होंने शहीद तुषार महाजन को समर्पित किया। ‘अंतरा’ शब्द का अर्थ है मन की बात को समझना, जो उनकी रचनाओं की आत्मा को दर्शाता है। कम शब्दों में गहरी बात कहने वाली उनकी गजलें सीधे दिल तक पहुंचती हैं। वर्ष 2021 से 2022 के बीच उनकी तीन पुस्तकें-‘तेरे जाने के बाद’, ‘हसरतों का दीप’ और ख्याल-ए-अंतरा’ प्रकाशित हुईं। उन्होंने चंडीगढ़ में राष्ट्रीय स्तर पर जम्मू-कश्मीर का प्रतिनिधित्व भी किया है। कुसुम शर्मा बताती हैं कि विवाह के बाद उन्हें परिवार का पूरा सहयोग मिला। तीन बच्चों के साथ अपनी पहचान बनाए रखना कठिन जरूर है लेकिन असंभव नहीं। उनका संदेश है कि अपनी मन की आवाज को दबाना नहीं चाहिए। हौसला हो तो कोई भी काम मुश्किल नहीं होता।
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