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Udhampur News: पंचगव्य व देसी जड़ी-बूटियों से घरेलू उत्पाद तैयार कर 80 महिलाएं बनीं आत्मनिर्भर

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काह फलाटा में गाय के गोबर, पंचगव्य से घरेलू उत्पाद तैयार करती महिलाएं।
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- काह फ्लाटा की महिलाओं ने पेश की महिला सशक्तीकरण की मिसाल
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संवाद न्यूज एजेंसी
उधमपुर। शहर के साथ लगते काह फ्लाटा गांव की महिलाओं ने पंचगव्य और जडी-बूटियों से घरेलू जरूरत के उत्पाद तैयार कर आत्मनिर्भरता की तरफ कदम बढ़ाया है। घर में ही काम शुरू कर महिलाएं अच्छी खासी आमदन हासिल कर रहीं हैं। यह महिलाएं लोगों को केमिकल मुक्त वस्तुएं भी उपलब्ध करवा रही हैं।
इन उत्पादों में अब गोबर के दीये, गोकंड की राख से होली के हर्बल रंग, रंग-बिरंगी मूृर्तियां, सजावटी पेंटिंग्स इत्यादि विभिन्न प्रकार के 60 किस्म के उत्पाद शामिल हैं। गांव की लगभग 80 महिलाएं घर में ही उत्पाद तैयार कर रही हैं। श्री गोकुल गोधाम के नाम से शुरू किए गए इस घरेलू उद्योग की शुरुआत करीब तीन साल पहले स्थानीय निवासी अर्चना देवी ने पति मनोहर लाल की प्रेरणा से की। उनके पति सरकारी मुलाजिम हैं और गोसेवा समिति से जुड़े हुए हैं।
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उत्तराखंड से प्रशिक्षण लेकर किया काम
अर्चना देवी ने केमिकल मुक्त देसी उत्पाद तैयार करने का आइडिया पत्नी से साझा किया। पत्नी ने भी पूरी मेहनत से सहयोग की हामी भरी और घरेलू स्तर पर इस काम को शुरू कर दिया। उत्तराखंड से प्रशिक्षण लेकर अर्चना ने अपने आसपास के घरों की महिलाओं को भी अपने इस काम में साथ जोड़ा और पहली बार साल 2023 के सितंबर माह से दीपावली पर्व के लिए खासतौर पर गोबर से दीये बनाने का काम शुरू किया।
पहली बार माकेग्ट में दीयों को खास तवज्जो नहीं मिली लेकिन जैसे-जैसे दुकानदारों के माध्यम से लोगों को इनके बारे में जानकारी मिलती गई मांग भी बढ़ने लगी। पहली बार में ही उन्होंने दीवापली पर 20 हजार से अधिक दीयों की बिक्री कर अच्छा खासा मुनाफा कमा लिया। इससे प्रोत्साहन मिला, तो पंचगव्य के इस्तेमाल से धूप, हवन सामग्री आदि धार्मिक कार्याें में इस्तेमाल होने वाली वस्तुओं के निर्माण का कार्य भी शुरू कर दिया। होली के पर्व पर केमिकल फ्री रंग से लेकर दीवारों में लगाने के लिए वाल पुट्टी तक महिलाओं द्वारा तैयार की जा रही हैं।
सेल्फ हेल्प ग्रुप की महिलाएं मिलकर काम कर रहीं
हिंदू धर्म में गाय को माता के रूप में पूजा जाता है। इससे प्राप्त होने वाले पंचगव्य को अमृत तुल्य गणकारी और उपायोगी माना जाता है। इससे निर्मित होने वाली वस्तुएं पूरी तरह से केमिकल फ्री हैं और मार्केट में मांग भी काफी अधिक है। इससे प्रेरित होकर अब गांव के सेल्फ हेल्प ग्रुप की महिलाएं साथ में मिलकर इस काम को कर रही हैं। सभी को इससे घरेलू रोजगार मिल रहा है और आमदन भी हो रही है। पूरे जम्मू-कश्मीर में इस तरह की शायद यह पहली शुरूआत है। आगे इस उद्योग को पीएमईजीपी के सहयोग से बढाने के प्रयास भी शुरू किए गए हैं।-अर्चना देवी
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बेहद कम पूंजी निवेश और कम मेहनत

गांव में सेल्फ हेल्प की ग्रुप की संचालक हूं और काफी संख्या में उनके ग्रुप की महिलाएं इस काम में दिलचस्पी दिखा रही हैं क्योंकि इसमें बेहद कम पूंजी निवेश और कम मेहनत है। दिनचर्या के अन्य कार्याें से थोड़ा सा समय निकाल कर इस काम को कोई भी महिला अपने घर पर बैठकर कर सकती है। मार्केट में मांग अच्छी होने के कारण इसके विपणन को लेकर भी अधिक समस्या नहीं हैं।
-अनीता रानी
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गरीब महिलाओं को मिल रहा रोजगार

गांव की सभी महिलाएं एकत्रित होकर इस काम को कर रहीं हैं। इससे आपस में मेल मिलाप भी बढ़ रहा है और रोजगार भी प्राप्त हो रहा है। घरेलू कार्यों से जब भी फुरसत मिलती है तो यहां आकर इस काम में जुट जाती हूं। अर्चना देवी की तरफ से शुरू की गई पहल काफी अच्छी है। इससे गांव की गरीब महिलाओं को भी रोजगार मिल रहा है और वे आत्मनिर्भरता की तरफ बढ़ रहीं हैं।
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रेखा शर्मा

गोबर को सुखा कर पहले पाउडर फार्म में लाया जाता है
गोबर को सुखा कर पहले पाउडर फार्म में लाया जाता है और फिर इसमें देसी जड़ी-बूटियों का अर्क मिलाया जाता है। जिससे इसकी महक पूरी तरह से खत्म हो जाती है। इससे बने उत्पाद काफी ज्यादा मजबूत होते हैं। लोग
इन्हें काफी ज्यादा पसंद भी कर रहें हैं।
-शैली देवी
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