सेना के प्रवक्ता के अनुसार स्योजधार इलाके में तैनात जवानों को रविवार को सूचना मिली थी कि बकरवाल समुदाय की एक महिला लकड़ी काटते समय अचानक गिर गई है। उसके सिर में गहरी चोट लगने के कारण वह लगभग दो घंटे तक जंगल में बेहोश पड़ी रही। जैसे ही इस आपात स्थिति की सूचना सेना को मिली, जवान बिना एक पल गंवाए तुरंत मौके के लिए रवाना हो गए।
इतनी ऊंचाई और दुर्गम क्षेत्र होने के कारण महिला को तुरंत अस्पताल पहुंचाना नामुमकिन था, इसलिए सेना ने तकनीक और अपनी मेडिकल ट्रेनिंग का बेहतरीन इस्तेमाल किया। सेना के बैटल फील्ड नर्सिंग असिस्टेंट्स ने मौके पर ही वीडियो कंसल्टेशन के जरिए डॉक्टरों से राय ली। जवानों ने महिला के घाव को साफ कर एनेस्थीसिया दिया और वहीं जंगल में ही 12 टांके लगाए। दर्द निवारक दवाइयां और ड्रिप देकर महिला की स्थिति को स्थिर किया गया।
और फिर दूसरी चुनाैती भी पार की
घटनास्थल पर इलाज कर हालत स्थित होने के अब दूसरी बड़ी चुनाैती महिला को सुरक्षित नीचे लाना था। रास्ते के मुश्किल और उबड़-खाबड़ हालात को देखते हुए सेना के जवानों ने अपने चार पोर्टर्स की मदद ली। घायल महिला को स्ट्रेचर पर सुरक्षित लाटी गांव तक लेकर आए। इसी बीच, एंबुलेंस से आगे ले जाने और इलाज के लिए सिविल हॉस्पिटल लाटी के साथ तालमेल बिठाया गया। इससे महिला को तुरंत अस्पताल भेजा जा सका।
पीड़ित परिवार का भी रखा ख्याल
सेना प्रवक्ता ने बताया कि समय पर किया गया यह चिकित्सा हस्तक्षेप और रेस्क्यू ऑपरेशन दूरदराज के क्षेत्रों में नागरिकों की सहायता के लिए सेना की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।