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Udhampur News: 12 वर्ष से बरामदे में चल रहा सरकारी प्राइमरी स्कूल डकोल

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उधमपुर/रामनगर। बसंतगढ़ तहसील में सरकारी प्राइमरी स्कूल डकोल करीब 12 वर्ष से घर के बरामदे में चल रहा है। विद्यार्थियों को पढ़ने के लिए छत तो मिली है, लेकिन अन्य कई सुविधाओं के अभाव में शिक्षा हासिल करने को मजबूर है। स्कूल की अपनी इमारत का निर्माण कार्य 2011 में शुरू किया। दीवारें खड़ी करने के बाद ठेकेदार ने काम बंद कर दिया और आज तक इसका काम शुरू नहीं हो पाया है।
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जिले के ग्रामीण इलाकों में मौजूद सरकारी स्कूलों की हालत खराब है। कई स्कूल आज भी इमारत के अभाव में चल रहे हैं। सरकारी प्राइमरी स्कूल डकोल की इमारत का निर्माण कार्य करीब 12 वर्ष से बंद पड़ा है और स्कूल ग्रामीण के घर के बरामदे में चल रहा है। 2008 में ईजीएस सेंटर से स्कूल को प्राइमरी स्कूल बनाया गया था। 2011 में इसकी इमारत का निर्माण कार्य शुरू किया। ठेकेदार ने दीवारें खड़ी कीं और शिक्षा विभाग के साथ विवाद होने के बाद अचानक से काम को बंद कर दिया।
वहीं स्कूल को गांव के ही एक घर के कमरे में स्थानांतरित कर दिया गया। स्कूल का सामान कमरे में रख दिया और बच्चों को बाहर बरामदे में बैठ कर शिक्षा हासिल करनी पड़ रही है।
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स्कूल की शिक्षिका सुनीता कुमारी ने बताया कि स्कूल में 30 विद्यार्थी हैं और इनको बरामदे में बैठ कर शिक्षा हासिल करनी पड़ रही है। बारिश होने पर परेशानी दोगुनी हो जाती है। कई बार उच्चाधिकारियों को स्कूल की अधूरी इमारत के कारण होने वाली परेशानियों से अवगत करवाया, लेकिन आज तक इमारत का निर्माण कार्य पूरा करवाने को प्रयास नहीं किए गए हैं।

कोट
अधूरी इमारत के बारे में कई बार लिखित में ज्ञापन एसडीएम और शिक्षा विभाग के अधिकारी को सौंपे हैं और अधिकारियों की तरफ से कुछ नहीं किया गया है। ग्रामीणों को केवल आश्वासन ही हासिल हुए हैं। इसके कारण ग्रामीणों के बच्चे सुविधाओं के अभाव में शिक्षा हासिल करने को मजबूर हैं।
-संजय कुमार

बच्चों को हर रोज परेशानियों से जूझते हुए शिक्षा हासिल करनी पड़ रही है। बरामदे में न तो शौचालय की सुविधा मिल पा रही है और न ही पानी की। अगर अपनी इमारत बन जाए तो सारी परेशानी दूर हो जाएगी।
-कांता देवी, अभिभावक
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अपनी इमारत नहीं होने के कारण मिड-डे-मील बनाने में भी परेशानी हो रही है। 12 वर्ष से स्कूल बरामदे में चल रहा है और शिक्षा विभाग को कोई चिंता नहीं सता रही है। ऐसा लग रहा है शिक्षा विभाग विद्यार्थियों के लिए अपनी इमारत बनाना ही नहीं चाहता है।
-सुलेखा देवी अभिभावक
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शिक्षा विभाग स्कूल को चलाने के लिए जिसके कमरे और बरामदे का इस्तेमाल कर रहा है, उसको कई वर्ष से कमरे का किराया भी नहीं दिया गया है। अगर मकान मालिक को किराया नहीं दिया जा रहा है तो फिर बच्चों को सुविधाएं कैसे मिलेंगी।
-फारूक अली, अभिभावक

मैंने दो महीने पहले ही जेडईओ का पदभार संभाला है और मुझे इस स्कूल की समस्या के बारे में अवगत नहीं करवाया गया है। अगर इमारत का निर्माण कार्य बंद है और विद्यार्थी परेशान हैं तो जल्द ही इसका समाधान निकालने को लेकर काम किया जाएगा।
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-ईश्वर दास, जेडईओ डुडु,
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