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जल संकट पर फूटा आक्रोश: कटड़ा में प्रदर्शन से जम्मू मार्ग बाधित

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प्रदर्शन के दौरान जम्मू मार्ग पर लगा लंबा जाम। 
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कटड़ा से दो किमी दूर जम्मू मार्ग पर स्थित कड़माल क्षेत्र में पानी संकट
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स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने तुरंत प्रभाव से पाइपलाइन को हटवाया
संवाद न्यूज एजेंसी
कटड़ा। धर्मनगरी कटड़ा से करीब दो किलोमीटर दूर जम्मू मार्ग पर स्थित कड़माल क्षेत्र में सोमवार को गंभीर जल संकट को लेकर स्थानीय निवासियों का गुस्सा फूट पड़ा। महिलाएं और अन्य ग्रामीण सड़कों पर उतर आए और लगभग दो घंटे तक जोरदार प्रदर्शन किया, जिससे जम्मू-कटड़ा मार्ग पर यातायात भी बाधित हो गया।
प्रदर्शनकारी ग्रामीणों का आरोप है कि जल शक्ति विभाग उनके गांव के पारंपरिक जल स्रोत से अवैध रूप से पाइपलाइन बिछाकर पानी को कहीं और स्थानांतरित कर रहा है। उनका दावा है कि यह प्राकृतिक जल स्रोत वर्षों से उनकी जीवनरेखा रहा है, जिसका उपयोग धार्मिक आयोजनों, दैनिक ज़रूरतों और यहां तक कि मार्ग से गुजरने वाले श्रद्धालुओं के लिए भी किया जाता है। ग्रामीणों ने बताया कि सोमवार को ही विभाग द्वारा पाइपलाइन बिछाने का काम शुरू कर दिया गया था, जिसकी भनक लगते ही उनमें रोष फैल गया। मंगलवार सुबह होते ही बड़ी संख्या में लोग जम्मू-कटड़ा मार्ग पर उतर आए और पाइपलाइन हटाने की मांग को लेकर नारेबाजी शुरू कर दी।
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प्रदर्शन की सूचना मिलते ही जल शक्ति विभाग के अधिकारी दीपक महाजन मौके पर पहुंचे और प्रदर्शनकारियों से बातचीत की। महाजन ने कहा कि पानी, चाहे नाले में हो या बावड़ी में, उस पर अधिकार सरकार का ही होता है। हालांकि, उन्होंने लोगों को आश्वासन दिया कि किसी भी तरह का फैसला स्थानीय लोगों की सहमति के बिना नहीं लिया जाएगा और उन्हें भी पाइप से पानी दिया जाएगा। स्थिति को देखते हुए तुरंत प्रभाव से पाइपलाइन को हटवा दिया गया और उच्चाधिकारियों को पूरे मामले से अवगत करा दिया गया है।
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हालांकि, स्थानीय लोगों ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि भविष्य में दोबारा बिना अनुमति जल स्रोत से छेड़छाड़ की गई तो वे और उग्र आंदोलन करेंगे। ग्रामीणों का कहना है कि प्राकृतिक संसाधनों पर उनका अधिकार है और प्रशासन को उनके हितों को नज़रअंदाज नहीं करना चाहिए।

ग्रामीणों की प्रमुख मांगें:
जल स्रोत से किसी भी तरह की पाइपलाइन हटाई जाए।
गांव को जल आपूर्ति में प्राथमिकता दी जाए।
भविष्य में बिना ग्रामीणों की अनुमति के कोई कार्य न किया जाए।

मामले की निष्पक्ष जांच होगी। जल आपूर्ति से संबंधित कोई भी निर्णय अब प्रशासनिक स्तर पर चर्चा और ग्रामीणों की भागीदारी के बाद ही लिया जाएगा।
दीपक महाजन, जल शक्ति विभाग के अधिकारी
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