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सेवा, सुमिरन और सत्संग है सतगुरु का दिया वरदान : महात्मा मनोज

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उधमपुर। संत निरंकारी भवन में आयोजिय बाल समागम में लगाई गई प्रदर्शनी : संवाद
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संवाद न्यूज एजेंसी
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उधमपुर। संत निरंकारी सत्संग भवन उधमपुर में रविवार को जोनल स्तरीय बाल संत समागम हुआ। इसमें उधमपुर के साथ लांसी, चंपैड़ी, चढ़ेई, कटड़ा, बिंडला, रियासी, मजालता, चनुनता व अन्य कई शाखाओं से बाल संतों ने हिस्सा लिया। इसमें भजन, विचार, कविताओं और स्किट के जरिए सतगुरु और निरंकार प्रभु की महिमा का गुणगान किया गया।
इस अवसर पर महात्मा मनोज गोयल विशेष तौर पर मौजूद थे। कार्यक्रम में बाल संतों की तरफ से प्रदर्शनी भी लगाई, जिसके जरिए बताया गया कि किस प्रकार हम सेवा, सुमिरन और सत्संग के माध्यम से अपने जीवन को सुखमय बना सकते हैं।
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सतगुरु माता सुदीक्षा महाराज के पावन आशीष से सुबह करीब 11 बजे बाल संत समागम का शुभारंभ हुआ। समागम से पहले महात्मा मनोज गाेयल ने प्रदर्शनी देखी और बाल संतों की तरफ से बनाए गए विभिन्न प्रकार के मॉडलों की सराहना की। इसके बाद बाल संतों ने भजन, विचार, कविताओं के माध्यम से बारी बारी से सतगुरु की महिमा का गुणगान किया।
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महात्मा मनोज गोयल ने अपने विचारों में बताया कि कैसे बच्चे बाल संत से जुड़ कर अपना सामाजिक व आध्यात्मिक विकास कर सकते हैं। संत, सेवा और सुमिरन करने से अपने सतगुरु पर विश्वास को मजबूत किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि सेवा, सुमिरन और सत्संग सतगुरु का वरदान है और इससे जीवन सुखी और सुंदर बनता है। इसलिए माता पिता अपने बच्चों को सत्संग में जरूर लाएं। बाल समागम के संपन्न होने पर गुरु के लंगर करवाया गया।
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