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Udhampur News: सलमेय पुल का निर्माण कार्य शुरू न होने पर लोगों ने किया प्रदर्शन

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सलमेय पुल का निर्माण न शुरू होने पर प्रदर्शन करते लोग। संवाद
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- असुरक्षित घोषित पुराने पुल से बड़े वाहनों को नहीं है आवाजाही की अनुमति, डेढ़ लाख की आबादी प्रभावित
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संवाद न्यूज एजेंसी
उधमपुर। तीन साल से असुरक्षित घोषित घोरड़ी-बरमीन ब्लॉक को जिला मुख्यालय से जोड़ने वाले सलमेय पुल का मामला अब तूल पकड़ता नजर आ रहा है। लगभग डेढ़ लाख आबादी को जिला मुख्यालय से जोड़ने वाले पुल का निर्माण शुरू न होने से गुस्साए लोगों ने मंगलवार को सलमेय रोड पर प्रदर्शन किया।
प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि एक तो यात्री वाहनों को पुल से गुजरने की अनुमति नहीं है तो वहीं दूसरी तरफ यात्री वाहनों के चालकों को मजबूरन तवी पार करके अपनी जान जोखिम में डालनी पड़ रही है। आखिरकार पुल के लिए डीपीआर और पैसा मंजूर होने के बावजूद भी निर्माण कार्य शुरू क्यों नहीं किया जा रहा।
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गौरतलब है कि चिनैनी हाइड्रो प्रोजेक्ट की नहर को जोड़ने वाले सलमेय पुल को तीन साल पहले असुरक्षित घोषित कर दिया गया था। जिसके चलते नहर के ऊपर बने पुल से मेटाडोर, बस या ट्रक आदि कोई भी भारी वाहनों को आने-जाने के अनुमति नहीं है जिसकी वजह से जिला मुख्यालय और घोरड़ी बरमीन से लगती लगभग डेढ़ लाख आबादी को मजबूरन रोजाना पैदल ही पुल पार करना पड़ता है और दोनों ओर से वाहन बदलने पड़ते हैं।
हालांकि कुछ वाहन तवी के रास्ते से आरपार होते हैं जो मौजूदा समय में चल रही बरसात के कारण बड़े हादसे का कारण बन सकता है। इससे परेशान होकर मंगलवार को लोगों ने सड़क जाम कर सलमेय पुल के एक छोर पर प्रदर्शन किया।
छात्र और कर्मचारी वर्ग भी परेशान

प्रदर्शनकारी पखलाई निवासी रमेश कुमार, लड्डन निवासी पुरुषोत्तम शर्मा, जयदेव सिंह व रशपाल का आरोप था कि बड़े यात्री वाहन बंद होने पर ऑटो यात्रियों को सलमेय से शहर तक पहुंचाने का काम कर रहे थे लेकिन परिवहन विभाग के अधिकारी ने उन पर भी कई पाबंदियां लागू कर दीं। इस वजह से मुख्य रूप से कर्मचारियों और छात्रों को काफी अधिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कोई भी समय पर अपने कार्यालय या स्कूल कालेज नहीं पहुंच पा रहा है और कई किलोमीटर पैदल सफर तय करने को मजबूर हैं। खासकर किसी व्यक्ति विशेष के बीमार या घायल होने पर उसे जीएमसी उधमपुर पहुंचाना भी मुश्किल हो जाता है।
फंड
को लेकर हो रही राजनीति

बताते चलें कि पुल के असुरक्षित घोषित होने पर नाबार्ड की ओर से नए पुल के निर्माण को लेकर परियोजना तैयार की गई। इसके तहत लगभग 24 करोड़ की लागत से तैयार होने वाले पुल की लगभग एक साल पहले डीपीआर भी मंजूर कर ली गई है इसके बावजूद पिछले तीन सालों से पुल के निर्माण को लेकर कोई भी कदम नहीं उठाया गया। उस पर पुल के लिए जारी किए गए फंड को लेकर राजनीति भी गर्माई हुई है जिसका सीधा असर डेढ़ लाख आबादी की रोजमर्रा के जीवन पर पड़ रहा है।
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जल्द ही पुल का निर्माण कार्य शुरू करने का दिया आश्वासन
वहीं प्रदर्शन की जानकारी मिलने पर तहसीलदार उधमपुर जयदेव सिंह और थाना प्रभारी रघुवीर सिंह चौधरी भी मौके पर पहुंचे। उन्होंने प्रदर्शनकारियों से बात की और उन्हें समझाने की कोशिश की। उन्होंने आश्वासन दिया कि प्रशासन की ओर से जल्द ही पुल का निर्माण कार्य शुरू कराया जा रहा है। प्रशासन के आश्वासन के बाद प्रदर्शन समाप्त कर दिया गया। पुल पर जारी हल्के वाहनों के आवाजाही को फिर से बहाल कर दिया गया।
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