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Udhampur News: धनुर्धर शीतल 5वीं के पाठ्यक्रम में शामिल

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-हिंदी की पुस्तक ‘भाषा प्रवाह’ में शीतल के संघर्ष को पढ़ेंगे बच्चे, पैरा एथलीट संदीप सिंह का भी उल्लेख
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राजेश चंद्रकिश्तवाड़। पैरों से ही प्रत्यंचा चढ़ाकर लक्ष्य संधान करने वाली किश्तवाड़ की धनुर्धर बेटी शीतल देवी के संघर्ष व सफलता की कहानी 5वीं कक्षा के पाठ्यक्रम का हिस्सा बन गई है। शिक्षा विभाग ने हिंदी की पुस्तक ‘भाषा प्रवाह’ में उसे शामिल किया है।

यह उस लड़की के जुनून की कहानी है जिसके माता-पिता उसके पैदा होते ही सदमे में आ गए थे। वही बच्ची पूरी दुनिया के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई है। भाषा प्रवाह का छठा पाठ शीतल देवी पर है। पुस्तक में शीतल की कहानी कुछ ऐसे शुरू होती है-बच्चों आपने फ्रांस के लुई ब्रेल का नाम तो सुना होगा, जिन्होंने आंखें न होने के बावजूद ब्रेल लिपि का आविष्कार किया, जिसे हाथों के स्पर्श से पढ़ा जा सकता है।
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इस प्राथमिक परिचय के बाद पुस्तक में पूरे डेढ़ पेज में शीतल के ही संघर्षों की गाथा दर्ज है। पुस्तक में शीतल देवी के साथ जम्मू-कश्मीर निवासी संदीप सिंह का भी उल्लेख है। संदीप ने एक हादसे में दोनों बाजू गंवा दिए। उन्होंने पैरा एथलीट बनकर दुनिया भर में नाम रोशन किया।
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दोनों हाथ नहीं, हर संघर्ष को पार कर पाया अर्जुन अवॉर्ड

शीतल का जन्म 10 जनवरी 2007 को किश्तवाड़ के लोईधार गांव में हुआ। पिता मान सिंह खेती करते और मां शक्ति देवी घर में बकरियां संभालतीं। जन्मजात बीमारी फोकोमेलिया की वजह से शीतल के दोनों हाथ नहीं थे। शीतल को पढ़ने का बड़ा शौक था। वह अफसर बनना चाहती थीं। सेना ने बचपन मेंे ही उसे गोद ले लिया था। सेना के एक अधिकारी ने माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड कटड़ा की तीरंदाजी अकादमी के कुलदीप वेदवान को शीतल के बारे में बताया। बस यहीं से शीतल के जीवन की दिशा और दशा दोनों बदल गई। शीतल के लिए विशेष धनुष बनवाया गया जो पैरों से चलाया जाता। इसके बाद शीतल ने पीछे मुड़कर नहीं देखा और अर्जुन अवाॅर्ड का सम्मान हासिल किया।
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