उधमपुर। रत्ना मोती पैलेस फंग्याल रठियान उधमपुर में जारी शिव महापुराण कथा के पांचवें दिन संत सुभाष शास्त्री महाराज ने कहा कि जितनी भी साधनाएं हैं वह मन को शुद्ध करने और मन को वश में करने की हैं। मन को हम जहां चाहे, वहां से हटा सकें और अपने लक्ष्य में लगा सकने की हैं।
मन शांत हो, स्थिर हो तो आनंद दूर नहीं है। मन हमारा मित्र बन सके तो जरूरत है हम मन को समझें। मन चंचल है दिन भर सोचता विचारता रहता है। हम अपनी इंद्रियों के माध्यम से जो भी ग्रहण करते हैं वह हर चीज हमारे मन पर बहुत गहरा प्रभाव डालती है।
हम सोचते हैं सुख कहीं बाहर है। हम यह वस्तु प्राप्त कर लेंगे, तो बहुत आनंद आएगा। संत कहते हैं जब हम किसी भी चीज को पूर्ण समर्पण के साथ करते हैं तो मन शांत होता है। अगर मन शांत है तो आप जहां हैं वही संतुष्ट हैं।