बाल रोग सलाहकार बोले- यह है आनुवंशिक रक्त विकार, कोई भी हो सकता है बीमारहीमोग्लोबिन, लाल रक्त कोशिकाएं होती हैं प्रभावित, चढ़ाना पड़ता है रक्त
संवाद न्यूज एजेंसी
उधमपुर। जिले में 38 बच्चे थैलेसीमिया बीमारी से ग्रस्त हैं, जिनका उपचार एसएमजीएस अस्पताल जम्मू में चल रहा है। यह जानकारी जीएमसी उधमुपर के प्रिंसिपल डॉ. मृत्युंजय और पैथोलॉजी विभाग की प्रमुख डॉ. महिमा शर्मा के मार्गदर्शन में विश्व थैलेसीमिया दिवस पर हुए कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने दी। बाल रोग सलाहकार डॉ. दीपक शर्मा ने बताया कि जरूरी नहीं कि छोटे बच्चे ही नहीं अन्य भी इस बीमारी से ग्रसित हो सकते हैं।
यह एक आनुवंशिक रक्त विकार है, जो बच्चों को माता-पिता से मिलता है। इस बीमारी में हीमोग्लोबिन और लाल रक्त कोशिकाएं प्रभावित होती हैं। वहीं, इस बीमारी से ग्रसित को हर माह खून चढ़ाना पड़ता है साथ ही आयरन को कम करने की दवाइयां दी जाती हैं। विश्व थैलेसीमिया दिवस बीमारी के बारे में मिथकों को दूर करने और बेहतर उपचार व देखभाल विकल्पों के लिए अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए समर्पित है। विश्व थैलेसीमिया दिवस 2024 के सबसे महत्वपूर्ण संदेशों में से एक है इस बीमारी से जुड़े मिथकों के बारे में जागरूक होना। 2024 के लिए फोकस यह सुनिश्चित करना है कि थैलेसीमिया से पीड़ित सभी व्यक्तियों को सटीक निदान, वर्तमान और भविष्य के उपचार और अच्छी तरह से देखभाल हो सके।
पैथोलॉजी विभाग की ओर से हुई पोस्टर मेकिंग प्रतियोगिता
थैलेसीमिया रोग और रोगियों में विवाह पूर्व, प्रसवपूर्व और प्रसवोत्तर निदान, प्रबंधन और आनुवंशिक परामर्श के महत्व के बारे में जागरूकता पैदा करने के लिए पैथोलॉजी विभाग की ओर से प्रस्तुतिकरण, पोस्टर मेकिंग प्रतियोगिता सहित विभिन्न जागरूकता गतिविधियां आयोजित की गईं। पोस्टर मेकिंग प्रतियोगिता के विजेताओं को सम्मानित किया गया। बाल चिकित्सा ओपीडी में पैथोलॉजी विभाग द्वारा थैलेसीमिया रोगियों की बीमारी, इसके शीघ्र निदान और प्रबंधन के बारे में आम जनता और पैरामेडिकल छात्रों को जागरूक किया गया। बाल रोग सलाहकार डॉ. दीपक शर्मा ने भी रोग के प्रबंधन के बारे में जानकारी दी। जागरूकता के प्रतीक के रूप में बाल चिकित्सा ओपीडी में बच्चों को छोटे उपहार भी वितरित किए गए।