-2019 में अनसेफ कर दी गई थी बिल्डिंग, फिर भी लग रहीं कक्षाएं
- कैसी है पाठशाला का लोगो लगाएं
संवाद न्यूज एजेंसी
उधमपुर। दशकों पहले हिंदी के प्रख्यात जनकवि नागार्जुन ने अपनी कविता, ''घुन खाए शहतीरों पर की बारहखड़ी विधाता बाचे, फटी भीत है, छत है चूती, आले पर बिस्तुइया (छिपकली) नाचे, बरसा कर बेबस बच्चों पर मिनट-मिनट में पांच तमाचे, इसी तरह से दुखरन मास्टर गढ़ते हैं आदम के साचे'' के माध्यम से सरकारी सरपरस्ती में चल रहे प्राइमरी स्कूलों की दुर्दशा का वर्णन किया है।
1918 में लिखी इस कविता के सौ साल से अधिक हो गए हैं पर आज भी सरकारी प्राइमरी स्कूलों की हालत कमोवेश ऐसी ही दिखती है। शहर से नजदीक पंचायत संसू का सरकारी मिडिल स्कूल मगैनी 100 साल से भी अधिक पुरानी जर्जर इमारत में चल रहा है। इस इमारत की हालत इतनी अधिक खराब हो चुकी है कि साल 2019 में सुरक्षा ऑडिट टीम ने निरीक्षण के बाद इसे अनसेफ घोषित कर दिया था।
हैरानी इस बात की है कि इसके बावजूद असुरक्षित इमारत में ही कक्षाएं चलाकर नौनिहालों और शिक्षकों की जान से खिलवाड़ किया जा रहा है। वर्तमान में इस स्कूल में 88 विद्यार्थी और सात शिक्षक हैं। सरकारी प्राथमिक विद्यालय के भवन और स्कूल के स्थान के लिए भारतीय राष्ट्रीय भवन संहिता (एनबीसी) ने जो मानक तैयार किए हैं वह कहीं भी पूरा होता नहीं दिखता।
स्कूल के पास वर्तमान में तीन कनाल जमीन उपलब्ध है। इसमें करीब 15 साल पहले दो नए कमरे भी तैयार किए गए हैं, जिनमें से एक में किंडरगार्टन और दूसरे कमरे में एक अन्य कक्षा चलती है। शेष सात कक्षाएं असुरक्षित घोषित हो चुके भवन में ही चल रही हैं। इससे बच्चे और शिक्षक दोनों खौफ में हैं। वे बीते कई सालों से लगातार इस समस्या का समाधान करने के लिए जिम्मेदारों से गुहार लगा रहे हैं लेकिन प्रशासन और संबंधित विभाग को इसकी गंभीरता का अंदाज नहीं है। बरसात के दौरान शिक्षक और बच्चे बेहद तनाव में आ जाते हैं।
समाजसेवी पवन देव सिंह ने बताया कि जर्जर स्कूल का मुद्दा कई बार शिक्षा विभाग से लेकर प्रशासनिक अधिकारियों व नेताओं के समक्ष उठा चुके हैं। यही नहीं ''बैक टू विलेज '' से लेकर जिला विकास बोर्ड की बैठक तक में इस मसले को संज्ञान में लाया जा चुका है मगर सभी अनजान बने हुए हैं।
1924 में बनी इमारत में हैं जेलों के सेल की तरह कमरे-
जानकारी के मुताबिक पांच कमरों वाली इस पुरानी इमारत को सन् 1924 में एक सराय के तौर पर बनवाया गया था।1950 के आसपास इसे प्राइमरी स्कूल बना दिया गया। बाद में विद्यार्थियों की संख्या बढ़ने पर 80 के दशक में इसे अपग्रेड कर मिडिल स्कूल बना दिया गया। इसके बाद इसकी हालत लगातार जर्जर होती गई और मगर किसी ने ध्यान नहीं दिया। अब यह इतनी अधिक बदहाल हो चुकी है कि बारिश के दौरान छतें बुरी तरह से टपकती हैं। कमरे में पानी भर जाता है।
दीवारों पर जगह जगह पड़ी दरारें और सीलन इस भवन की बदहाली खुद बयां कर रहे हैं। छोटे-छोटे कोठरी नुमा कमरों में बैठने पर घुटन महसूस होती है। कहीं छत भहराकर गिर न पड़े इस डर से दो कमरों में कक्षाओं का संचालन बंद करना पड़ा है। कुछ कक्षाएं बरामदे में लगती हैं। पर अब वह जगह भी महफूज नहीं है। बरामदे के पिलर और टिन गिरने की कगार पर हैं। स्कूल की चहारदीवारी की हालत तो ऐसी है कि जरा सा धक्का लग जाए तो जमींदीज हो जाए।
स्कूल की हालत काफी ज्यादा जर्जर है। बारिश होने पर पानी कमरों में आ जाता है और छत भी टपकने लगती है। जिससे पढ़ाई में भी परेशानी होती है।मीनाक्षी देवी
स्कूल के छोटे-छोटे सेलनुमा कमरे हैं। दीवारों की दरारें व छत से कमरे के अंदर बरसात का पानी भर जाता है। इससे डर लगता है। इसलिए अब स्कूल में नए कमरों की जरूरत है-विधि
कमरों के अलावा खेलकूद के लिए स्कूल के पास कोई खेल मैदान भी नहीं है। इसकी बाउंड्री की जर्जर हालत से भी हादसे का डर बना रहता है।-आहिल खान
स्कूल में पढ़ाई को लेकर किसी तरह की कोई समस्या नहीं है लेकिन स्कूल की जर्जर इमारत से हमेशा डर लगा रहता है। पता नहीं कब गिर जाय और हम उसमें दब जाएं। हादसे की आशंका से माता पिता भी चिंता में रहते हैंरकीब
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साल 2019 में आयोजित सुरक्षा ऑडिट में इस पुरानी इमारत को असुरक्षित घोषित किया गया था। उसके बाद इसे ध्वस्त करना था, लेकिन अभी तक इसके डिस्मेंटल एस्टीमेट की प्रक्रिया पूरी नहीं की जा सकी है। बरसात के सीजन में हादसे का खतरा अधिक रहता है, फिलहाल डीडीसी अध्यक्ष के स्तर से तीन नए कमरों को मंजूरी दी गई है। जल्द ही डिस्मेंटल प्रक्रिया भी पूरी होने की उम्मीद है।प्राध्यापक, सतवीर सिंह चौधरी
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विभाग की तरफ से प्रयास किया जा रहा है कि सभी स्कूलों की हालत को सुधारा जाए और इसको लेकर कार्रवाई भी हो रही है। मिडिल स्कूल मगैनी की पुरानी इमारत को भी ध्वस्त करके नई इमारत बनाई जानी है इसको लेकर भी प्रयास लगातार जारी हैं।सीईओ कमल किशोर बडयाल
रिपोर्ट-विजय कुमार
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सरकारी प्राथमिक विद्यालय के भवन और स्कूल के स्थान के लिए भारतीय राष्ट्रीय भवन संहिता (एनबीसी) ने
निम्नलिखित मानक निर्धारित किए गए हैं पर यह कहीं भी पूरा होता नहीं दिखता :
- स्कूल का स्थल आवासीय क्षेत्रों से आसानी से सुलभ होना चाहिए।
- स्कूल का स्थल भारी यातायात वाली सड़कों, नदियों, तालाबों, रेलवे पटरियों आदि से दूर होना चाहिए।
- स्कूल का स्थल उच्च वोल्टेज लाइनों से दूर होना चाहिए।
- स्कूल का स्थल शोर और प्रदूषण वाले क्षेत्रों जैसे सिनेमाघरों, कारखानों और शॉपिंग सेंटरों से दूर होना चाहिए।
भवन डिज़ाइन और मानक
- कक्षाओं का आकार प्रति छात्र 2-2.5 वर्ग मीटर होना चाहिए।
- कक्षाओं की ऊंचाई कम से कम 3 मीटर होनी चाहिए।
- गलियारों की चौड़ाई कम से कम 1.8 मीटर होनी चाहिए ताकि व्हीलचेयर जैसे सहायक उपकरणों के लिए पर्याप्त जगह हो।
- शौचालयों की संख्या प्रति 15 छात्रों पर 1 शौचालय होनी चाहिए, जिसमें सभी के लिए पहुंच सुनिश्चित हो।
- आपातकालीन निकास और आग बुझाने के उपकरणों की व्यवस्था होनी चाहिए।
अन्य मानक
- प्रति छात्र निर्मित क्षेत्र: प्राथमिक विद्यालयों में प्रति छात्र निर्मित क्षेत्र 1.8 वर्ग मीटर होना चाहिए।
- कक्षा का आकार: कक्षा का आकार छात्रों की संख्या और गतिविधियों के अनुसार निर्धारित किया जाना चाहिए।
- पार्किंग: स्कूल में वाहनों के लिए पार्किंग की व्यवस्था होनी चाहिए।