किल वेस्ट प्लांट बंद, मैन्युअली तौर पर कैमिकल की मदद से किया जा रहा कचरे को खत्म
ग्रामीण फिर नाराज, बोले- शहर के 21 वार्डों की गंदगी रोजाना जमा होने से फिजा हो जाएगी दूषित
संवाद न्यूज एजेंसी
उधमपुर। दो साल से बंद पडे किल वेस्ट प्लांट सुई में नगर परिषद की तरफ से अब मैन्युअली (हाथों से) कचरे का निस्तारण शुरू दिया है। यहां अभी तीन से चार टन कचरे का निस्तारण किया जा रहा है। इससे शहरवासियों को डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण की सुविधा का लाभ मिलेगा। वहीं, शहर फिर से कचरे से मुक्त होगा।
विरोध के चलते सुई में किल वेस्ट प्लांट बंद होने के बाद नगर परिषद की ओर से मांड में अपनी जमीन पर ही कचरा फेंका जा रहा था। लेकिन वहां भी कचरे का निपटान कार्य शुरू नहीं हो पाने के कारण शहर में डोर टू डोर गाॅरबेज कलेक्शन का काम प्रभावित होने लगा था। अब दोबारा से डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण सेवा शुरू करने के बाद सुई में मैन्युअली रूप से कचरे का निस्तारण शुरू किया है। इस बीच फिर से विरोध होना शुरू हो गया है। लोगों का कहना है कि जो काम मशीनरी से संभव नहीं हुआ वह हाथों से कैसे होेगा। इसका खामियाजा ग्रामीणों को भुगतना पड़ेगा। रोजाना शहर के 21 वार्डों के पहुंचने वाले कचरे का हाथों से निस्तारण संभव नहीं है। इससे फिजा दूषित हो जाएगी।
ग्रामीणों ने बताया कि पहले भी यहां सैकड़ों टन कचरा जमा हो गया था। इसी बीच प्लांट ने काम करना बंद कर दिया और यह कचरा गांव वासियों के लिए परेशानी का सबब बन गया था। मजबूरन होकर लोगों को प्रर्दशन का सहारा लेना पड़ा था। बाद में नगर परिषद ने नया कचरा डालना बंद कर पहले से जमा कचरे का निपटान शुरू किया था। अब पहले वाला किल वेस्ट प्लांट भी बंद है। नगर परिषद अब मैनुअली कैमिकल से कचरे का निपटान करवा रहा है। ग्रामीण फिर से पैदा होने वाली दिक्कतों को देखते हुए चिंतित हैं। उन्होंने नगर परिषद व प्रशासन से मांग उठाई है कि कचरा निपटान का काम बंद करने के साथ ही यहां फैक्टरी बनाई जाए। प्लांट की चहारदीवारी कर इसका गेट गांव की तरफ से हटाया जाए। -
प्रशासन का आबादी वाले इलाके में इस तरह का प्लांट बिल्कुल भी नहीं लगवाना चाहिए था। इस कारण ग्रामीण परेशान हैं। रात दिन कचरे की वजह से लोगों को दुर्गंध के बीच रहना पड़ रहा है। प्रशासन से अपील है कि समस्या का जल्द समाधान करवा कर राहत दिलाई जाए।
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शोभा देवी, स्थानीय निवासी
शहर ही गंदगी यहां डंप करने से गांव में दुर्गंध फैली रहती है, जिस कारण लोगों का जीना मुहाल हो जाता है। गंदगी के कारण आसपास के प्राकृतिक जलाशयों का पानी भी दूषित होता है। विरोध के बावजूद नगर परिषद जबरदस्ती लोगों को गंदगी में झोंक रहा है।
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सुषमा देवी, स्थानीय निवासी
प्लांट की वजह से आसपास के करीब 20 परिवार प्रभावित होते हैं। एक तरफ सरकार स्वच्छता अभियान चलाती है और दूसरी ओर रिहायश के पास कचरा फेंका जा रहा है, जोकि लोगों के साथ अन्याय है। सरकार से अपील है कि यहां कचरा डालने पर रोक लगाई जाए।
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लक्ष्मी पठानिया, स्थानीय निवासी
प्लांट के कारण गांव का पर्यावरण दूषित हो रहा है। गर्मी में मच्छर और मक्खियों की समस्या उत्पन्न होगी। यहां बीमारियां फैलने का भय है। प्लास्टिक निगलने से मवेशी बीमार होते हैं। प्रशासन को लोगों की दिक्कत को समझना चाहिए।
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ज्योति प्रधान, स्थानीय निवासी
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यहां सिर्फ घरों से एकत्र कचरे का ही निस्तारण हो रहा है। अभी 2-3 टन कचरा ही यहां लाया जा रहा है, जिसकी क्षमता 7-8 टन की जाएगी। ग्रामीणों की मांग पर आगे खाली जगह पर मिट्टी डलवाकर पार्क तैयार करने और गेट को गांव की तरफ से हटाने का विचार किया जा रहा है। प्रयास है कि ग्रामीणों को कोई परेशानी न हो।
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कार्तिकेय शर्मा, साइट इंचार्ज
सुई में कैमिकल से कचरे का निस्तारण शुरू किया है। यहां सिर्फ घरों से निकलने वाले कचरे को ही लाया जाएगा। पहले की तरह डंपिंग की परेशानी लोगों को नहीं झेलनी पड़ेगी। इसके लिए ग्रामीणों को आश्वस्त किया है। उन्हें पहले की तरह कोई परेशानी नहीं होगी।
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अमित शर्मा, सीईओ, नगर परिषद