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Udhampur News: घायल पिता घर चलाने में लाचार हुए तो बेटी ने थाम लिया बस का स्टेयरिंग

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उधमपुर। स्कूल बस चालक देवेंद्र कौर: सोशल मीडिया
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उधमपुर की देवेंद्र कौर बनी महिला सशक्तीकरण की उदाहरण
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छह माह पहले सड़क हादसे में घायल हो गए थे उनके पिता
संवाद न्यूज एजेंसी
उधमपुर। जिम्मेदारी निभाने में बेटियां किसी भी मायने में बेटों से पीछे नहीं हैं। कुछ बेटियां मिसाल बन जाती है। ऐसी ही प्रेरणादायक कहानी है उधमपुर के वार्ड 17 की 20 वर्षीय देवेंद्र कौर की। अपने घायल पिता की जगह स्कूल बस का स्टेयरिंग संभालकर न केवल वह परिवार का पालन-पोषण कर रही हैं बल्कि महिला सशक्तीकरण का उदाहरण बन गई हैं।
तीन बेटियों के पिता गोरख सिंह पिछले 18 वर्षों से बस चालक के रूप में निजी स्कूल में कार्यरत थे। छह महीने पहले सड़क हादसे में उन्हें गंभीर चोटें आईं। डॉक्टरों ने उन्हें आराम करने की सलाह दी। इस मुश्किल घड़ी में परिवार की आर्थिक स्थिति डगमगाने लगी। देवेंद्र कौर ने साहस दिखाया और अपने पिता के काम को अपने हाथ में ले लिया। वह स्कूल बस चलाकर घर और स्कूल की जिम्मेदारी संभाल रही हैं।
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देवेंद्र कौर के इस कदम को स्कूल प्रशासन और अभिभावकों ने खूब सराहा है। उनका कहना है कि परिवार में कोई बेटा नहीं होने के कारण आर्थिक बोझ की जिम्मेदारी संभालने की चिंता पैदा हो गई थी। बेटी ने भी पढ़ाई के साथ-साथ बस का स्टेयरिंग थाम कर परिवार के जीवन की गाड़ी का सफलतापूर्वक संचालन शुरू कर साबित कर दिया है कि बेटियां भी बेटों से कहीं कमतर नहीं हैं।
उधमपुर में आज देवेंद्र कौर का नाम केवल एक बेटी के तौर पर नहीं बल्कि एक प्रेरणा के रूप में लिया जा रहा है। उनका यह साहसिक कदम उन तमाम महिलाओं के लिए प्रेरणा है जो रूढि़वादी सोच को तोड़कर आत्मनिर्भर बनने का सपना देख रही हैं। देवेंद्र की कहानी इस बात का प्रमाण है कि जब बेटियां ठान लें तो किसी भी मुश्किल को पार किया जा सकता है।
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जिम्मेदारी आई तो पीछे नहीं हटी

देवेंद्र कौर का कहना है कि स्कूटर, ऑटो, वैन आदि चलाने का तजुर्बा पहले से था लेकिन कभी सोचा नहीं था कि एक चालक के तौर पर अपनी पहचान बनाउंगी लेकिन जब जिम्मेदारी आई तो पीछे नहीं हटी। अब मुझे गर्व है कि मैं खुद को आत्मनिर्भर कह सकती हूं। बस चलाना एक अच्छा पेशा है। अन्य क्षेत्रों की तरह महिलाएं भी इसमें अच्छी आय अर्जित कर सम्मानपूर्वक आजीविका कमा सकती हैं। अन्य महिलाओं और युवतियों को भी यही संदेश है कि आज महिलाएं किसी भी क्षेत्र में पुरुषों से पीछे नहीं हैं। इसलिए बिना घबराएं आगे बढ़े और अपने आपको सशक्त बनाएं।
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