संवाद न्यूज एजेंसी
उधमपुर। उधमपुर जिले में लगातार बारिश, अचानक आई बाढ़ और भूस्खलन से हुई तबाही के मद्देनजर जिला विकास परिषद (डीडीसी) उधमपुर की उपाध्यक्ष जूही मन्हास पठानिया ने रविवार को सुंडला, नक्की, खून, थाटी, पलनू सहित अन्य गंभीर रूप से प्रभावित क्षेत्रों का व्यापक दौरा किया।
मजालता तहसील के सुंडला गांव में कथित तौर पर विनाशकारी भूस्खलन से आवासीय घरों के प्रभावित होने के बाद उत्पन्न स्थिति का जायजा लेने के लिए उपाध्यक्ष ने क्षेत्र का दौरा किया और राहत एवं पुनर्वास प्रयासों की गहन समीक्षा की।
अपने दौरे के दौरान, पठानिया ने पाया कि 20 घर मलबे में तब्दील हो गए हैं जबकि 50 अन्य घरों को प्रशासन और स्थानीय निवासियों ने एहतियात के तौर पर खाली करा दिया है। चुनौतियों के बावजूद, राहत कार्य संतोषजनक पाए गए। एक सामुदायिक रसोईघर, जो एक समय में लगभग 200 लोगों की जरूरतों को पूरा कर रहा था, सुचारू रूप से चल रहा था।
अस्थायी आश्रय प्रदान करने के लिए टेंट लगाए गए थे और पानी की सुविधा और जैविक शौचालय उपलब्ध थे। चिकित्सा देखभाल और स्वच्छता सुविधाएं भी प्रदान की जा रही थीं, प्रशासन और स्थानीय समुदाय मिलकर बिस्तरों और स्वच्छता किटों सहित आवश्यक वस्तुओं का वितरण कर रहे थे।
पठानिया ने भूस्खलन के प्रभाव की सीमा और भविष्य में संभावित जोखिमों का आकलन करने के लिए प्रभावित क्षेत्र और आसपास के क्षेत्रों का एक व्यापक भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण करने की आवश्यकता पर बल दिया। कहा कि यह सर्वेक्षण भूस्खलन की आशंका वाले क्षेत्रों की पहचान करने और भविष्य में ऐसी आपदाओं को कम करने के लिए रणनीतियाँ बनाने में मदद करेगा।
इसके अलावा उपाध्यक्ष ने प्रभावित क्षेत्र में सामान्य स्थिति बहाल करने के लिए बिजली, पेयजल, सड़क संपर्क और स्वास्थ्य सुविधाओं सहित आवश्यक सेवाओं को बहाल करने के महत्व पर बल दिया। उन्होंने संबंधित विभागों को सभी प्रभावित परिवारों के बीच राहत सामग्री का समान और पारदर्शी वितरण सुनिश्चित करने के लिए काम करने का निर्देश दिया।
उन्होंने स्थानीय निवासियों को आश्वासन दिया कि प्रशासन भविष्य में आने वाली आपदाओं के प्रभाव को कम करने के लिए दीर्घकालिक शमन उपाय अपनाने के लिए प्रतिबद्ध है। इन उपायों में बुनियादी ढांचे को मलबूत करना, ढलान स्थिरीकरण, बाढ़ नियंत्रण कार्य और पूर्व चेतावनी तंत्र शामिल हैं।
उन्होंने बताया कि इस दौरे का उद्देश्य जमीनी हालात का जायजा लेना, नुकसान का आकलन करना और चल रहे राहत कार्यों की गति की समीक्षा करना था। उपाध्यक्ष ने सभी संबंधित विभागों को राहत और पुनर्वास कार्यों के लिए पूरी तरह तैयार रहने का निर्देश दिया। उन्होंने भविष्य में ऐसी आपदाओं के प्रभाव को कम करने के लिए बुनियादी ढांचे को मजबूत करने, ढलान स्थिरीकरण, बाढ़ नियंत्रण कार्यों और पूर्व चेतावनी तंत्र सहित दीर्घकालिक शमन और आपदा-तैयारी रणनीतियों को अपनाने पर जोर दिया।
दौरे के दौरान उनके साथ मोहन लाल शर्मा,पूर्व नायब सरपंच, रमन खजूरिया, रेणु शर्मा, आदि अधिकारी शामिल थे।