संवाद न्यूज एजेंसी
उधमपुर। जम्मू-कश्मीर राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम 1987 के अंतर्गत जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने लोक अदालत में मोटर वाहन अधिनियम के अंतर्गत दायर दावा याचिका का निपटारा किया। इसमें 32 लाख रुपये का मुआवजे के भुगतान के निर्देश दिए गए।
याचिका में पीड़ित पक्ष की ओर से 166 मोटर वाहन अधिनियम के तहत बीमा कंपनी से मुआवजे का दावा किया गया। अदालत ने याचिकाकर्ता राहुल देव सिंह और प्रतिवादी बीमा कंपनी दोनों पक्षों को सुनने के बाद यह फैसला लिया। विभिन्न दावेदारों के बीच मुआवजे का बंटवारा न्यायाधिकरण की ओर से संवितरण के दौरान निर्धारित किया जाएगा। दस्तावेज में उपस्थित सदस्यों के हस्ताक्षर लिए गए जो शर्तों में उनकी सहमति की पुष्टि करते हैं।
पीड़ित पक्ष के लिए पूर्ण और अंतिम 32 लाख के मुआवजे का भुगतान बीमा कंपनी को 60 दिन के भीतर करना होगा। ऐसा करने में विफल रहने पर सुनवाई के दिन से 7.5 प्रतिशत ब्याज दर भी अदा करनी होगी। गौरतलब है कि भारत के मोटर वाहन अधिनियम, 1988 की धारा 166 यह निर्धारित करती है कि दुर्घटना के बाद मुआवजे के लिए कौन आवेदन कर सकता है, जिसमें घायल व्यक्ति, क्षतिग्रस्त संपत्ति का मालिक और मृतक के कानूनी प्रतिनिधि शामिल होते हैं।
इसमें यह भी निर्दिष्ट किया गया है कि आवेदन मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण को किया जाना चाहिए, जो आवेदन पर विचार करता है, सुनवाई करता है और मुआवजे की राशि का निर्णय सुनाता है। पुलिस की दुर्घटना रिपोर्ट को भी एक आवेदन माना जा सकता है और दावेदारों को न्यायाधिकरण का स्थान चुनने में लचीलापन मिलता है।