भंडारे के साथ गीता भवन में आयोजित तीन दिवसीय श्री हरि कथा का समापन
साध्वी दीक्षा भारती ने समझाया ईश्वर भक्ति और राष्ट्र भक्ति का अंतर
संवाद न्यूज एजेंसी
चिनैनी। ईश्वर भक्ति और राष्ट्र भक्ति एक सिक्के के दो पहलू हैं। ईश्वर भक्ति से ही मानव हृदय में राष्ट्रप्रेम की भावना जागृत होती है। एक राष्ट्र प्रेमी ईश्वर भक्ति की राह पर चलकर आत्म कल्याण एवं जगत कल्याण की ओर अग्रसर रहता है। यह ज्ञान आशुतोष महाराज की शिष्या साध्वी दीक्षा भारती ने दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान की ओर से गीता भवन चनैनी में आयोजित तीन दिवसीय श्री हरि कथा के समापन अवसर पर संगत को दिया। कथा का समापन भंडारे के साथ हुआ।
उन्होंने बताया कि स्वामी विवेकानंद, महर्षि अरविंद घोष, रानी लक्ष्मी बाई आदि अनेकों महान विभूतियां ईश्वर प्रेम और राष्ट्र प्रेम के समन्वय की पराकाष्ठा हैं। ईश्वर भक्ति के शाश्वत सूत्र को शास्त्र ग्रंथ हमारे समक्ष रखते हैं। ईश्वर की भक्ति का प्रारंभ ईश्वर दर्शन से होता है। प्रभु कृष्ण कहते हैं की ईश्वर समस्त प्राणियों के भीतर विद्यमान है। मनुष्य को जिज्ञासु भाव के साथ पूर्ण सद्गुरु के सानिध्य में जाकर ईश्वर दर्शन की अभिलाषा को रखनी चाहिए। सद्गुरु ब्रह्म ज्ञान में दीक्षित कर अंतर जगत में ही प्रभु के सनातन रूप अर्थात ज्योति रूप का दर्शन करवा देते हैं। कुछ लोग ईश्वर दर्शन को ही ईश्वर प्राप्ति समझ लेते हैं। परंतु ईश्वर दर्शन भक्ति मार्ग का प्रारंभ है और निरंतर भक्ति मार्ग पर अग्रसर साधक सतसंग, सेवा, साधना, सुमिरन द्वारा अंततः ईश्वर रूपी मंजिल को प्राप्त करता है। कथा का समापन आरती के साथ हुआ। उसके बाद लंगर का आयोजन हुआ।