कठिन था टास्क
प्राकृतिक बाधाएं : जोफड़ का इलाका घने जंगलों और चट्टानों के बीच बनी गुफाओं से भरा है। आतंकियों के पास छिपने के लिए प्राकृतिक बंकर थे जबकि सुरक्षाबल खुले में आगे बढ़ रहे थे और लक्ष्य को अपने दम पर तलाशना था।
मौसम का मिजाज: तलाशी अभियान के दौरान पहाड़ों पर अचानक गिरता तापमान और धुंध ने दृश्यता को लगभग शून्य कर देता था लेकिन फिर भी सतर्क रहना था।
आतंकियों का ट्रेनिंग लेवल : मारे गए आतंकी विदेशी मूल के और पूरी तरह से हथियारों से लैस थे जो घात लगाकर हमला करने में माहिर थे।
धैर्य की परीक्षा : जवान रातों-रात बिना हिले-डुले पोजीशन में डटे रहे। यह वेट एंड वॉच की रणनीति थी ताकि आतंकी गलती करने के लिए मजबूर हो जाएं।
टेक्नोलॉजी का साथ : घने जंगलों के बीच आतंकियों की लोकेशन ट्रेस करने के लिए हाई-टेक ड्रोन्स और थर्मल इमेजिंग कैमरों का इस्तेमाल किया गया।
पहाड़ों से ऊंचे थे सेना के मंसूबे: यह ऑपरेशन हथियारों की लड़ाई नहीं थी बल्कि मानसिक मजबूती की परीक्षा थी। जवानों ने साबित किया कि पहाड़ कितना भी ऊंचा क्यों न हो, तिरंगा हमेशा सबसे ऊपर रहेगा। दोनों आतंकियों के सफाए के साथ जोफड़ गांव के पास हुआ यह खात्मा रामनगर और बसंतगढ़ के लोगों के लिए एक बड़ी राहत लेकर आया है।