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Udhampur: ऊबड़-खाबड़ पहाड़ों में सुरक्षाबलों ने लिखी शौर्य की नई इबारत, 20 घंटे की मुठभेड़ में दो आतंकी ढेर

Fri, 06 Feb 2026 11:45 AM IST
निकिता गुप्ता सौरभ सागर अमर उजाला नेटवर्क, उधमपुर

सार

उधमपुर के जोफड़ इलाके में दुर्गम पहाड़ियों और घने जंगलों में 20 घंटे चली मुठभेड़ के बाद सुरक्षाबलों ने दो आतंकियों को ढेर कर दिया।
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दिच्छड़ के पास मुठभेड़ के बाद सुरक्षा में तैनात जवान। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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नुकीले पत्थर, कांटेदार झाड़ियां और देवदार के पेड़ों से सटे घने जंगल में 2 मीटर दूर खड़ा दुश्मन भी नजर न आए। ऐसे इलाके में आखिर तीन माह बाद सेना ने मंगलवार दोपहर 4 बजे से शुरू हुई मुठभेड़ के 20 घंटे बाद दो आतंकियों को ढेर कर शौर्य की नई परिभाषा लिखी है।

उधमपुर जिला मुख्यालय से 65 किलोमीटर दूर रामनगर और बसंतगढ़ के सीमावर्ती क्षेत्र जोफड़ के ऊंचे पहाड़ों से मुठभेड़ हुई। यहां की चढ़ाई इतनी खड़ी है कि एक जवान का सांस फूलना तय है लेकिन हमारे जांबाजों के हौसले इन चोटियों से भी ऊंचे थे। पिछले तीन महीने से सुरक्षाबल सर्च ऑपरेशन के माध्यम से क्षेत्र में छिपे तीन आतंकियों की तलाश में जुटे थे।

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23 जनवरी को बसंतगढ़ और बिलावर के सीमावर्ती इलाके में सेना ने एक आतंकी को मार गिराया था। दो आतंकी घने जंगल, अंधेरे और कोहरे की आढ़ में फरार हो गए थे। इसके बाद सेना ने बिलावर से बसंतगढ़ और रामनगर तक तलाश जारी रखी।

मंगलवार को आतंकियों के किया इलाके में छिपे होने की सूचना मिली। सेना ने घेराबंदी की। डीडीसी अश्री देवी व पूर्व वीडीसी केवल परिहार ने कहा कि सेना ने कई मीटर नीचे पहाड़ी चट्टान के पास छिपे आतंकियों को ढेर कर इलाके को बढ़ी राहत दी है।

हर कदम पर था जोखिम
ऑपरेशन में जोखिम हर कदम पर था। पहाड़ी ढलानों पर भारी साजो-सामान के साथ चढ़ना और फिर आतंकियों की अंधाधुंध फायरिंग का सामना करना। बुधवार की सुबह सुरक्षाबलों ने एक बार फिर अपनी जान हथेली पर रखकर यह सुनिश्चित किया कि एक भी आतंकी इस इलाके से निकलकर रिहायशी इलाकों की तरफ न बढ़ पाए। ऑपरेशन को अंतिम रूप देने के लिए सुरक्षाबलों ने आतंकियों को आत्मसमर्पण करने को भी मौका दिया लेकिन आतंकी फायरिंग करते रहे। जवाब में जवानों ने गुफा में छिपे आतंकियों मार गिराया।

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कठिन था टास्क
प्राकृतिक बाधाएं : जोफड़ का इलाका घने जंगलों और चट्टानों के बीच बनी गुफाओं से भरा है। आतंकियों के पास छिपने के लिए प्राकृतिक बंकर थे जबकि सुरक्षाबल खुले में आगे बढ़ रहे थे और लक्ष्य को अपने दम पर तलाशना था।
मौसम का मिजाज: तलाशी अभियान के दौरान पहाड़ों पर अचानक गिरता तापमान और धुंध ने दृश्यता को लगभग शून्य कर देता था लेकिन फिर भी सतर्क रहना था।
आतंकियों का ट्रेनिंग लेवल : मारे गए आतंकी विदेशी मूल के और पूरी तरह से हथियारों से लैस थे जो घात लगाकर हमला करने में माहिर थे।
धैर्य की परीक्षा : जवान रातों-रात बिना हिले-डुले पोजीशन में डटे रहे। यह वेट एंड वॉच की रणनीति थी ताकि आतंकी गलती करने के लिए मजबूर हो जाएं।
टेक्नोलॉजी का साथ : घने जंगलों के बीच आतंकियों की लोकेशन ट्रेस करने के लिए हाई-टेक ड्रोन्स और थर्मल इमेजिंग कैमरों का इस्तेमाल किया गया।
पहाड़ों से ऊंचे थे सेना के मंसूबे: यह ऑपरेशन हथियारों की लड़ाई नहीं थी बल्कि मानसिक मजबूती की परीक्षा थी। जवानों ने साबित किया कि पहाड़ कितना भी ऊंचा क्यों न हो, तिरंगा हमेशा सबसे ऊपर रहेगा। दोनों आतंकियों के सफाए के साथ जोफड़ गांव के पास हुआ यह खात्मा रामनगर और बसंतगढ़ के लोगों के लिए एक बड़ी राहत लेकर आया है।

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