स्थानीय जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की प्रतिक्रिया
नरसू गांव के सरपंच अशोक कुमार शर्मा ने बताया कि यह पुल ग्रामीणों की लंबे समय से चली आ रही मांग पर बनाया जा रहा था। इसका उद्देश्य बच्चों को स्कूल पहुंचाने और आवाजाही की सुविधा उपलब्ध कराना था। उन्होंने हादसे का कारण लापरवाही नहीं, बल्कि तेज बारिश और तूफान से हुए भूस्खलन को बताया। साथ ही उन्होंने पुल की डिजाइन में बदलाव और एक नई समिति के गठन की मांग की।
नरसू के जिला विकास परिषद (डीडीसी) सदस्य सुभाष चंदर ने कहा कि पुल गिरने की खबर मिलते ही संबंधित विभाग, स्थानीय विधायक और केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह को जानकारी दी गई। केंद्रीय टीमों ने मौके का दौरा किया। उन्होंने पुल के जल्द पुनर्निर्माण और तकनीकी खामी की जांच की मांग की, साथ ही दोषियों पर सख्त कार्रवाई की भी अपील की।
प्रशासन की प्रतिक्रिया
उप जिला विकास आयुक्त (एडीडीसी) राजिंदर सिंह ने बताया कि पुल निर्माण के दौरान नियमों के अनुसार फास्टनिंग (जोड़ने का कार्य) संभवतः सही तरीके से नहीं हुआ, जिससे हादसा हुआ। उन्होंने बताया कि उपायुक्त (डीसी) के निर्देश पर उन्होंने जांच कमेटी का नेतृत्व किया, जिसमें स्थानीय लोगों और विभागीय अधिकारियों से पूछताछ की गई। जांच में विभाग द्वारा निगरानी और सुपरविजन में कई खामियां पाई गई हैं। रिपोर्ट जल्द ही डीसी को सौंप दी जाएगी और सुधारात्मक कदम सुझाए जाएंगे।
इस हादसे ने प्रशासनिक निगरानी पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जहां एक ओर लोग वर्षो से इस पुल की उम्मीद लगाए बैठे थे, वहीं अब उन्हें कम से कम 5-6 महीने और इंतजार करना होगा। जांच जारी है और जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग लगातार उठ रही है।