- सुद्धमहादेव मंदिर में आज भी स्थापित है वो मूर्ति, प्रसिद्ध तीन दिवसीय मेला आज से
संवाद न्यूज एजेंसी
चिनैनी। तीन दिवसीय प्रसिद्ध सुद्धमहादेव मेला मंगलवार से शुरू होने जा रहा है। व्यापार मंडल के प्रधान कमल किशोर गुप्ता तथा स्थानीय लोगों की मानें तो सुद्धमहादेव के प्राचीन शिव मंदिर में जो भगवान शिव परिवार की जो मूर्ति स्थापित है, वह एक किसान को हल चलाते वक्त जमीन से मिली थी।
लोगों का कहना है कि वे अपने बुजुर्गों से सुनते आ रहे हैं और यह सत्य भी है। सुद्धमहादेव से करीब एक किलोमीटर दूर गांव लोधाना में एक किसान खेत में हल चला रहा था। हल जमीन में फंस गया और जमीन से खून निकलने लगा। किसान घबरा गया। जब उसने जमीन को खोद कर देखा तो वह हैरान रह गया। वहां भगवान शिव परिवार की सुंदर मूर्ति थी। किसान ने मूर्ति उठाई और चिनैनी के राजा के पास ले जाने लगा।
किसान सुद्धमहादेव में पहुंचा जहां भगवान शिव का प्राचीन शिवलिंग था, जो आज भी है। किसान मूर्ति का भार नहीं संभाला पाया और उसने विश्राम करने के लिए मूर्ति जमीन पर रख दी। कुछ देर बाद जब किसान ने मूर्ति को उठाने का प्रयास किया तो वह नहीं उठाई गई। किसान ने इसकी जानकारी राजा को दी। राजा ने सिपाहियों को भेजा और उस प्रतिमा साथ लाने को कहा, लेकिन उनसे भी मूर्ति नहीं उठाए गई। इसके बाद उसी स्थल पर मंदिर का निर्माण किया गया। इसके दर्शन के लिए हर वर्ष हजारों श्रद्धालु पहुंचते हैं।
मानतलाई में भगवान शिव की गई थी बारात, कुंड आज भी साक्षात
जम्मू से करीब 120 किलोमीटर दूर तथा जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग के पास स्थित चिनैनी से करीब 30 किलोमीटर दूर स्थित मानतलाई धार्मिक पर्यटक स्थल है। मानतलाई दो कारणों से काफी प्रसिद्ध रहा। पहला पौराणिक कथाओं के अनुसार यहां पर भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था। इस स्थल पर उनका विवाह हुआ था वह स्थान आज भी मौजूद है, और वह एक पवित्र तालाब का रूप धारण कर चुका है। वहीं दूसरा 80 के दशक में स्वामी धीरेंद्र ब्रह्मचारी ने यहां पर योग केंद्र की स्थापना की थी।
माता पार्वती गौरीकुंड में स्नान कर सुद्धमहादेव में करती थीं पूजा-अर्चना
स्थानीय लोगों के मुताबिक, सुद्धमहादेव में हजारों वर्ष पुराना शिवलिंग है। माता पार्वती मानतलाई से हर रोज स्नान के लिए गौरीकुंड जाया करती थीं। वहां पर स्नान करने के बाद सुद्धमहादेव में पूजा-अर्चना करने के लिए आती थीं। गौरीकुंड में वह कुंड आज भी मौजूद है, जिसका पवित्र जल श्रद्धालु ले जाते हैं।