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अस्थायी कर्मचारियों ने दिन में की ड्यूटी, शाम को शुरू की हड़ताल

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उधमपुर:जल शक्ति एंप्लायज एसोसिएशन के प्रधान सोमनाथ द्वारा पत्रकार वार्ता की गई. - फोटो : UDHAMPUR
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उधमपुर। अस्थायी कर्मचारियों को स्थायी बनाने और पांच वर्ष का रुका वेतन जारी करने की मांग को लेकर जल शक्ति विभाग के अस्थायी कर्मचारी शनिवार शाम से हड़ताल पर चले गए हैं। उन्होंने जिलावासियों को दिन में तो पानी समय पर दिया, लेकिन अगले दिन लोगों की मुसीबत बढ़ने वाली है।
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हड़ताल के पहले दिन जलापूर्ति व्यवस्था में कुछ ज्यादा असर देखने नहीं मिला। लेकिन, रविवार को इसका सीधा असर शहरवासियों पर पड़ेगा। शनिवार शाम को भी कई इलाकों में लोगों के यहां जलापूर्ति नहीं हुई। वहीं, हड़ताल करने से पहले सभी कर्मचारियों ने जल शक्ति इंप्लाइज एसोसिएशन के बैनर तले बैठक कर हड़ताल के लिए रणनीति तैयार की थी।
बैठक का आयोजन एसोसिएशन के जिला प्रधान सोमनाथ की अध्यक्षता में हुआ। बैठक में हिस्सा लेने के लिए जिले के विभिन्न हिस्सों से अस्थायी कर्मचारी पहुंचे थे। प्रधान ने कहा कि शनिवार शाम आठ बजे से हड़ताल शुरू हो गई है, जो रविवार रात आठ बजे तक जारी रहेगी। इन 24 घंटों के दौरान कोई भी अस्थायी कर्मचारी काम नहीं करेगा।
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उन्होंने कहा कि विभाग के अस्थायी कर्मचारियों को काम करते हुए 15 वर्ष से अधिक समय बीत गया है, लेकिन अब तक उन्हें स्थायी नहीं किया गया। ऊपर से उनका पांच वर्ष से ज्यादा का वेतन भी रोक कर रखा गया है। इसके कारण कर्मचारी आर्थिक परेशानियों से जूझ रहे हैं। एक वर्ष के अंदर ही कई कर्मचारियों ने आर्थिक तंगी से परेशान होकर आत्महत्या भी कर ली है।
प्रधान का कहना था कि जल शक्ति विभाग में स्टाफ की बहुत कमी है। एक कर्मचारी से तीन गुणा अधिक काम करवाया जा रहा है। हर वर्ष जल शक्ति विभाग करोड़ों के प्रोजेक्ट शुरू कर रहा है, लेकिन इनमें काम करने के लिए नए कर्मचारी नियुक्त नहीं किए जा रहे हैं। सरकार की तरफ से आज तक न्यूनतम मजदूर अधिनियम लागू नहीं किया गया है। इसी से परेशान होकर अब कर्मचारी हड़ताल करने को मजबूर होने लगे हैं।
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हड़ताल का फिलहाल कोई असर नहीं
शाम को हड़ताल शुरू होने पर जलापूर्ति ज्यादा प्रभावित नहीं हुई। जिन इलाकों में शाम को जलापूर्ति की जाती है, उनमें थोड़ा असर देखने को मिला। लेकिन, रविवार को हड़ताल का असर सीधा जिले के लोगों पर पड़ेगा। रविवार को शहर व ग्रामीण इलाकों में जलापूर्ति व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित होगी, और लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। जिले में फिल्टरेशन और पंपिंग का ज्यादातर काम अस्थायी कर्मचारी करते हैं। उनके हड़ताल पर होने पर लोगों तक साफ पानी पहुंचना बहुत मुश्किल होगा।
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