उधमपुर। रणजी ट्रॉफी की मेजबानी कर चुका सुभाष स्टेडियम पिछले 15 साल से बदहाली का शिकार हो रहा है। इसके लिए बार-बार स्वीकृत होने वाली करोड़ों की परियोजना कभी भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाती है तो कभी बजट के अभाव में धीमी रफ्तार खेल प्रेमियों के सपनों को ठेंगा दिखा रही है।
एक तरफ केंद्र सरकार की ओर से नशा मुक्त भारत अभियान के तहत युवाओं को खेलों के प्रति अग्रसर करने का प्रसार किया जा रहा है। इसके लिए खेलो इंडिया अभियान चलाया जा रहा है लेकिन जमीनी स्तर पर बुनियादी सुविधाओं की कमी बनी हुई है। लगभग 15 साल पहले तत्कालीन राज्य सरकार ने स्टेडियम को मोाहली स्टेडियम की तर्ज पर विकसित करने का बीड़ा उठाया था। मैदान में एक मशाल घर, एक इंडोर हॉल, दर्शक स्टैंड के अलावा भूमिगत सिंचाई प्रणाली, टर्फ विकेट और एक स्विमिंग पूल सहित सेंट्रल पवेलियन के लिए सात करोड़ रुपये से अधिक की परियोजना को मंजूरी दी थी। इसको लेकर 80 लाख रुपये की लागत से पवेलियन का काम शुरू हुआ, जो सुभाष स्टेडियम की बदहाली का नींव साबित हुआ। पवेलियन का काम बीच में बंद हो गया, इसकी वजह से स्टेडियम की हालत बदतर होनी शुरू हो गई।
15 साल पहले सात करोड़ की परियोजना ठप
सरकार ने स्टेडियम के विकास के लिए 2009-10 में सात करोड़ रुपये मंजूर किए थे। इसके बाद कुछ दिनों तक चले पवेलियन के निर्माण को बीच में रोकना पड़ा क्योंकि पवेलियन की सीढ़ियां घटिया सामग्री की होने के कारण हे ढह गई थीं। इसको लेकर जांच भी शुरू हुई। अब लगभग 15 साल होने को आए हैं लेकिन उस पवेलियन का काम दोबारा शुरू नहीं हो पाया। आज वही ढांचा भ्रष्टाचार का स्तंभ बनकर खड़ा है, जो खिलाड़ियों के भविष्य पर ग्रहण लगा रहा है।
अब 5.23 करोड़ की परियोजना अधर में
लगभग 12 साल बाद प्रधानमंत्री विकास पैकेज के तहत सुभाष स्टेडियम में 2022 में फिर से 5.23 करोड़ रुपये की लागत से एक नए पवेलियन का निर्माण कार्य शुरू किया गया। इसके अलावा खिलाड़ियों की सुविधा के लिए शौचालय, स्नानगृह, सेंट्रल पवेलियन, दर्शक स्टैंड, एथलेटिक ट्रैक, स्विमिंग पूल, शूटिंग रेंज, रोलर स्केटिंग रिंक, मल्टीपर्पज स्पोटर्स एक्टिविटी आदि परियोजना पर भी काम किया जाना है लेकिन पवेलियन के निर्माण के दौरान पैसा न मिलने की वजह से मार्च 2023 में ठेकेदार ने काम को बंद कर दिया था। कुछ महीनों के बाद पैसा अदा होने पर फिर निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया लेकिन मौजूदा समय में धीमी रफ्तार के कारण निर्धारित समय सीमा पूरी होने के बावजूद निर्माण कार्य अब तक पूरा नहीं हो पाया है, जबकि निर्माण कार्य को 2024 में ही पूरा हो जाना चाहिए था। इसकी वजह से लंबे इंतजार के बाद भी खिलाड़ियों को विकसित खेल मैदान का लाभ आज तक नहीं मिल पाया है।
खेल विशेषज्ञों की मानें तो सुभाष स्टेडियम अपने क्षेत्रफल के आधार पर प्रथम श्रेणी की सुविधाएं उपलब्ध कराने एवं मोहाली स्टेडियम की तर्ज पर विकसित करने में पूरी तरह से सक्षम है और सभी मापदंडों को पूरा करता है। खासकर यह स्टेडियम 90 के दशक में रणजी ट्राॅफी मेजबानी भी कर चुका है। ऐसे में मुख्य मैदान की दयनीय स्थिति काफी खेलप्रेमियाें के लिए चिंता का विषय है।
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एक तरफ सरकार नशाखोरी के खात्मे के लिए खेलो इंडिया का नारा दे रही है तो दूसरी तरफ जमीनी स्तर पर खेल से जुड़ी बुनियादी सुविधाओं का लाभ युवाओं तक नहीं पहुंच पा रहा है। प्रशासन को सिर्फ जम्मू या कश्मीर नजर आता है। उन्होंने कभी तीसरे सबसे बड़े जिले उधमपुर की ओर ध्यान ही नहीं दिया। यह स्टेडियम मेरे वार्ड में पड़ता है और इसके समाधान के लिए हरसंभव प्रयास करने की कोशिश की जा रही है।
-प्रीति खजूरिया, पूर्व पार्षद वार्ड नंबर 1, उधमपुर
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खेल समाज व देश के भविष्य से जुड़ा अहम हिस्सा है। इसके विकास और सुविधाओं को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाना चाहिए लेकिन यह उधमपुर के लिए दुर्भाग्यपूर्ण है कि पिछले 15 साल से सुभाष स्टेडियम के लिए तैयार की जा रही परियोजनाएं अभी तक सिरे नहीं चढ़ पाई हैं। इससे खेल प्रेमियों में भी काफी मायूसी है।
-सुरेश खजूरिया, प्रधान बैडमिंटन एसोसिएशन
बजट के अभाव में निर्माण कार्य की रफ्तार में कमी आई है लेकिन लगभग 50 प्रतिशत निर्माण पूरा हो चुका है। उम्मीद है कि निर्माण कार्य को जल्द पूरा कर लिया जाएगा ताकि खिलाड़ियों को बेहतर सुविधाएं मिल पाएं।
-संजीव शर्मा कार्यकारी अभियंता स्पोर्ट्स काउंसिल
फोटो सहित