भद्रवाह। भद्रवाह स्थित भारतीय सेना की राष्ट्रीय राइफल्स इकाई ने चिनाब क्षेत्र में तैनात सेना के जवानों के लिए 4 महीने का भद्रवाही भाषा पाठ्यक्रम शुरू करने के लिए जम्मू विश्वविद्यालय के भद्रवाह कैंपस के साथ एक समझौता किया है। इसका उद्देश्य सेना और स्थानीय आबादी के बीच बेहतर समझ विकसित करने और स्थानीय प्राचीन भाषाओं और उनकी बोलियों को संरक्षित करना है।
इसके लिए तैयार एमओयू पर कमांडिंग ऑफिसर 4 आरआर कर्नल रजत परमार और भद्रवाह कैंपस के रेक्टर प्रोफेसर राहुल गुप्ता ने शुक्रवार को भारतीय सेना और भद्रवाह कैंपस के ओएसडी आरिफ खतीब की मौजूदगी में हस्ताक्षर किए। इस समझौता ज्ञापन के अनुसार, जम्मू क्षेत्र में तैनात सैनिकों के लिए भद्रवाह कैंपस भद्रवाही भाषा में चार महीने का सर्टिफिकेट कोर्स चलाएगा। भद्रवाही एक प्राचीन भाषा है जिसमें चार बोलियाँ हैं, जिनमें सिराजी, पाडरी, पोगली और गद्दी शामिल हैं, जो डोडा, किश्तवाड़ और रामबन सहित चिनाब घाटी के सभी बेहतरीन तीन जिलों में बोली जाती है। ओएसडी आरिफ खतीब ने कहा कि पाठ्यक्रम संयुक्त रूप से भारतीय सेना के प्रशिक्षकों और भद्रवाही भाषा के जानकार बाहरी शिक्षाविद द्वारा संचालित किया जाएगा। वहीं इस अवसर पर सीओ 4 आरआर कर्नल रजत परमार ने जम्मू विश्वविद्यालय को विशेष रूप से कुलपति और रेक्टर को धन्यवाद दिया।
इस मौके भद्रवाह कैंपस के रैक्टर प्रो. राहुल गुप्ता ने भी भारतीय सेना (4आरआर) विशेष रूप से सीओ 4 आरआर कर्नल रजत परमार को भद्रवाही भाषा को बढ़ावा देने के लिए इस तरह की पहल करने के लिए बधाई दी।
समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर के दौरान उपस्थित प्रमुख अधिकारियों में मेजर आशुतोष सारस्वत (क्वार्टर मास्टर 4 आरआर), डॉ जतिंदर मन्हास (कंप्यूटर विज्ञान विभाग के आईसी प्रमुख), मुजीब शेख (सहायक रजिस्ट्रार) और आरिफ हलीम खतीब (ओएसडी) शामिल रहे।