अप्रैल में भी बदले मौसमी मिजाज से बढ़ी चुनौतियां, चिनैनी में ओलावृष्टि से ठिठुरन का अहसास
उधमपुर/किश्तवाड़/चिनैनी। अप्रैल में भी कुदरत का मिजाज बदला हुआ है। रविवार को चिनैनी, किश्तवाड़ में हुई ओलावृष्टि और बर्फबारी ने न केवल जनजीवन को प्रभावित किया है बल्कि लोगों के लिए नई चुनौतियां भी खड़ी कर दी हैं। चिनैनी में ओलावृष्टि ने दिसंबर जैसी ठंड का अहसास कराया। किश्तवाड़ की पहाड़ियों पर हुई ताजा बर्फबारी से तापमान में कमी आई। दूसरी ओर, उधमपुर में बारिश ने पेयजल आपूर्ति को दूषित कर दिया है जिससे स्वास्थ्य संबंधी खतरों की आशंका बढ़ गई है।
किश्तवाड़ में मौसम का मिजाज लगातार दूसरे दिन बिगड़ा रहा। दोपहर के बाद हल्की बूंदाबांदी हुई। पाडर के मचेल, वाड़वन घाटी के ऊंचे गांवों और सिंथन टॉप में ताजा बर्फबारी हुई। तापमान में आई गिरावट के चलते ऊंचाई वाले क्षेत्रों में रह रहे लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि आने वाले दिनों में भी मौसम में उतार-चढ़ाव बना रहेगा इसलिए लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
चिनैनी में सुबह की शुरुआत खिली हुई धूप के साथ हुई थी जिसका लोगों ने जमकर आनंद लिया। दोपहर बाद अचानक बादलों की गर्जना के साथ मौसम ने करवट ली। देखते ही देखते तेज बारिश के साथ ओलावृष्टि शुरू हो गई। हवाएं चलने से पूरा क्षेत्र भीषण ठंड की चपेट में आ गया।
बारिश और ओलावृष्टि इतनी अधिक थी कि बाजारों में कुछ ही देर सन्नाटा पसर गया। ग्रामीण इलाकों से खरीदारी करने आए लोगों को आनन-फानन में घर लौटना पड़ा। ठंड से बचने के लिए लोगों को न केवल गर्म कपड़ों का सहारा लेना पड़ा बल्कि कई स्थानों पर लोगों ने अलाव जलाकर राहत पाई। बारिश के कारण नदी-नालों के जलस्तर में भी भारी वृद्धि दर्ज की गई है।
सैलानियों की बढ़ी मुश्किलें
जम्मू संभाग के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल पटनीटॉप में भी मौसम का असर व्यापक रहा। यहां घूमने पहुंचे सैलानी बारिश के कारण फंस गए। कई पर्यटकों को घंटों तक बारिश से बचने के लिए इधर-उधर शरण लेनी पड़ी जबकि काफी सैलानी खराब मौसम के चलते होटलों के कमरों में ही दुबके रहे। पहाड़ियों पर गिरती बूंदों और ठंडी हवाओं ने पर्यटन गतिविधियों पर ब्रेक लगा दी।
दूषित पेयजल आपूर्ति से बढ़ा स्वास्थ्य का खतरा
उधमपुर में 10 अप्रैल तक सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ का असर अब बुनियादी सुविधाओं पर दिखने लगा है। लगातार बारिश के कारण तवी नदी का जलस्तर बढ़ गया है जिससे पेयजल आपूर्ति व्यवस्था चरमरा गई है। बाड़ेयां, रेहम्ती, भारत नगर, सयाल, शक्ति नगर और शिव नगर में नलों से मटमैला और मिट्टी युक्त पानी आ रहा है। स्थानीय राजेश्वर सिंह, कांता देवी और सोमराज के अनुसार पानी इतना गंदा है कि बर्तन में भरकर रखने पर नीचे मिट्टी की परत जम जाती है। लोगों को डर है कि दूषित पानी के सेवन से महामारी या अन्य गंभीर बीमारियां फैल सकती हैं।
नदी में बाढ़ और अधिक कीचड़ आने से पानी हुआ मटमैला
जलशक्ति विभाग के एईई अखिलेश गुप्ता ने स्पष्ट किया कि नदी में आई बाढ़ और कीचड़ की अधिकता के कारण फिल्ट्रेशन प्लांट के लिए पानी को पूरी तरह साफ करना चुनौतीपूर्ण हो गया है। उन्होंने कहा कि पूरी तरह सप्लाई बंद करने से लोगों को दैनिक कार्यों में दिक्कत होगी इसलिए फिलहाल इसी स्थिति में आपूर्ति की जा रही है। उन्होंने आश्वासन दिया कि मौसम साफ होते ही पेयजल की गुणवत्ता में सुधार हो जाएगा।