आखिरकार लोहड़ी पर्व की शाम को मौसम की बेरुखी दूर हो ही गई। पहाड़ बर्फ की सफेद चादर में लिपट गए और मैदानी क्षेत्रों में बारिश हुई, जिससे ठंड में भारी इजाफा हो गया था।
लोहड़ी की सुबह आसमान बादलों से घिरा हुआ था और ठंडी हवाएं चलने का दौर जारी था। दोपहर को मैदानी क्षेत्रों में पहले बूंदाबांदी हुई और पहाड़ों पर हल्की बर्फ पड़ी। लेकिन शाम होते ही पहाड़ों का नजारा देखने योग्य था।
पहाड़ धुंध के बीच लिपटे हुए थे और बर्फबारी हो रही थी। नत्थाटाप, जुगधार, शिवगढ़ धार, स्योजधार, देराटाप और अन्य ऊंची चोटियां बर्फ से लकदक होने शुरू हो गई थी।
पहाड़ों की सर्दियों की खूबसूरती बर्फ की सफेद चादर से ही देखते बनती थी। शाम तक पहाड़ों पर हिमपात जारी था और बर्फीली हवाएं चलने का दौर भी जारी था।
लोग अलाव चलाकर ठंड से बचने का प्रयास कर रहे थे और दुकानदार भी जल्द ही घरों में दुबक गए थे। उधर, पत्नीटाप में भी हल्की बर्फ पड़ी और उम्मीद थी कि रात तक पत्नीटाप की हसीन वादियां भी बर्फ से लिपट जाएगी। पहाड़ों पर हिमपात से लोगों को अब बारिश की उम्मीद व खुश्क ठंड से राहत पाने की उम्मीद थी।
वहीं किश्तवाड़ में भी मैदानी इलाकों में बारिश हुई जबकि पहाड़ों पर बर्फबारी हुई। इसके बाद तापमान में भारी गिरावट महसूस की जा रही है। आज शाम के समय करीब आधे घंटे तक ही बारिश हुई, उसके बाद फिर से वैसा ही मौसम हो गया।