संवाद न्यूज एजेंसी
कटड़ा। सिर्फ कर्म में नहीं, बल्कि कर्म के पीछे छिपे भाव से पाप और पुण्य का निर्णय तय होता है। यह प्रवचन स्वामी राजेश्वरानंद महाराज ने भूमिका मंदिर के पास स्थित श्री राजमाता जी आश्रम शनि मंदिर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन श्रद्धालुओं को किए।
उन्होंने कहा कि भगवान कृष्ण की माखन चोरी, गोपियों के स्नान के समय वस्त्र हरण आदि लीलाओं को सामान्य दृष्टि से देखने में तो बहुत दोष दिखाई देते हैं लेकिन इन लीलाओं के पीछे जो भाव हैं उससे जनकल्याण एवं व्यापक दृष्टि की शिक्षा प्राप्त होती है। माखन चोरी के पीछे का भाव है समाज में निर्धन-धनवान का भेद समाप्त करते हुए समरसता समभाव की स्थापना करना। यानी कन्हैया के घर प्रचुर मात्रा में घी माखन था तो उनके मित्र अभाव में जी रहे थे। अतः कन्हैया ने माखन चोरी भी किया तो उसके पीछे सेवा भाव रहा।
स्नान करती हुई गोपियों के वस्त्र हरण के पीछे उन्हें शिक्षा देनी है कि स्त्रियों को सदा मर्यादा में रहना चाहिए। साधारण मनुष्य और संत-महात्मा एक ही प्रकार से कर्म करते हैं लेकिन एक बंधन तो दूसरा मुक्ति का मार्ग प्रशस्त करता है।
आचार्य मनोज कृष्ण महाराज ने भगवान कृष्ण की बाललीला की कथाएं जिसमे पूतना वध, कालिया देह, गाय सेवा आदि के बाद गोवर्धन पूजा संदर्भ में कथा सुनाई। कथा विराम पर आरती के बाद शुभम शर्मा की ओर से प्रसाद वितरण किया गया। शनिवार को कथा संपन्न होगी तो रविवार को भंडारा लगाया जाएगा।